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उत्तराखंड में बिगड़ती कानून व्यवस्था:

 

राज्य में अपराधों की बाढ़ आ गई है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में हत्या, बलात्कार और लूट की घटनाएं 25% बढ़ीं। सरकार की लापरवाही से आमजन भयभीत है। क्या भाजपा ‘सुरक्षित उत्तराखंड’ का वादा भूल गई?

 

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि की मांग:

लाखों आंगनबाड़ी बहनों को न्यूनतम मानदेय मिल रहा है, जो महंगाई के सामने अपर्याप्त है। केंद्र की योजनाओं के बावजूद राज्य सरकार ने वृद्धि नहीं की। हमारी मांग: तत्काल 20,000 रुपये मासिक मानदेय सुनिश्चित करें। आगामी चुनाव में यदि कांग्रेस सत्ता में आई तो 24000 रुपए मानदेय सुनिश्चित किया जाएगा।

 

हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) में भ्रष्टाचार:

प्राधिकरण में जमीन घोटाले और अवैध निर्माण की खबरें आम हैं। करोड़ों के टेंडरों में भ्रष्टाचार का बोलबाला। अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने के बजाय लाल-फीताशाही के चलते अवैध निर्माण को बचाने का काम किया जा रहा है

●जांच क्यों नहीं हो रही? 

●जनता का पैसा लूटा जा रहा है।

● अवैध निर्माण पर कार्रवाई के बदले भ्रष्टाचार का अवसर ?

 

उत्तराखंड में भाजपा की ओछी मानसिकता की राजनीति:

भाजपा जाति-धर्म के नाम पर वोटबैंक की राजनीति कर रही है। धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति उत्तराखंड के विकास की सबसे बड़ी बाधा बन चुकी है। उत्तराखंड भाजपा ने कांग्रेस को बदनाम करने के लिए भावना पांडे जैसे लोगों को तैनात किया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के वादे झूठे साबित हुए। विपक्ष को बदनाम करने के बजाय मुद्दों पर जवाब देना चाहिए।

 

गोकशी की घटना में भाजपा नेता की संलिप्तता पर खामोशी:

लाठरदेवा, झबरेड़ा में भाजपा नेता की संलिप्तता सार्वजनिक रूप से सिद्ध हो चुकी है, फिर भी सरकार चुप्पी साधे है। गौ हत्यारों को बचाने का सरकार का प्रयास उत्तराखंड के लोगों की भावनाओं को आहत करता है। सरकार कार्रवाई करें वरना गौवंश संरक्षण का ढोंग बंद करें। 

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