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सड़कों से सहारे तक: दो बेसहारा लोगों को मिला ‘अपना घर आश्रम’ में नया जीवन

सड़कों से सहारे तक: दो बेसहारा लोगों को मिला ‘अपना घर आश्रम’ में नया जीवन

मानवता की मिसाल पेश करते हुए पांवटा साहिब क्षेत्र से दो मानसिक रूप से अस्वस्थ और बेसहारा व्यक्तियों का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया गया। लंबे समय से ये दोनों व्यक्ति सतौन बस स्टैंड और बातापुल चौक क्षेत्र में असहाय अवस्था में सड़कों पर भटक रहे थे।

जानकारी के अनुसार, दोनों व्यक्तियों के पास न रहने का कोई ठिकाना था और न ही भोजन की कोई व्यवस्था। तेज धूप, बारिश और सर्दी में खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर इन लोगों की मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं थी, जिसके चलते वे अपना नाम-पता तक बताने में असमर्थ थे।

सूचना मिलते ही सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तत्परता दिखाते हुए रेस्क्यू अभियान शुरू किया और दोनों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत एसडीएम पांवटा साहिब और पुलिस थाना पांवटा साहिब से आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई।

सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दोनों व्यक्तियों को सकुशल अपना घर आश्रम, रुड़की (उत्तराखंड) में शिफ्ट कर दिया गया। अब जहां कल तक ये सड़कों पर भूखे-प्यासे भटक रहे थे, वहीं आज उन्हें सिर पर छत, साफ कपड़े और समय पर भोजन मिल रहा है।

आश्रम में इन दोनों व्यक्तियों का चिकित्सकीय देखरेख में उपचार किया जाएगा। विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनकी मानसिक स्थिति में सुधार लाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे वे एक सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जी सकें।

इस पुनीत कार्य में सहयोग के लिए एसडीएम पांवटा साहिब और पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त किया गया। साथ ही ‘अपना घर आश्रम’ की पूरी टीम की सराहना की गई, जिन्होंने बेसहारा लोगों को अपनाकर इंसानियत की सच्ची मिसाल पेश की है।

“एक छोटा सा प्रयास किसी की पूरी जिंदगी बदल सकता है। बेसहारा लोगों की मदद के लिए समाज के हर व्यक्ति को आगे आना चाहिए।”

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