इमलीखेड़ा, हरिद्वार। नगर पंचायत इमलीखेड़ा में सांसद प्रतिनिधि विक्रम गर्ग की ऐतिहासिक हवेली उस समय चर्चा का केंद्र बन गई, जब हरिद्वार सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत हवेली का भ्रमण करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने हवेली की भव्यता, इसकी अनूठी बनावट और इससे जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों को करीब से जाना। 100 से अधिक कमरों वाली यह हवेली क्षेत्र की पुरानी विरासत और ऐतिहासिक पहचान का एक प्रमुख प्रतीक मानी जाती है।

सांसद प्रतिनिधि विक्रम गर्ग की इस प्रसिद्ध हवेली की विशाल संरचना और पारंपरिक वास्तुकला इसे अन्य इमारतों से अलग पहचान देती है। हवेली के भ्रमण के दौरान त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसकी बनावट और विशेषताओं को देखा तथा इसके इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर हवेली से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों पर भी चर्चा हुई।
1919 की चर्चित घटना से भी जुड़ा है हवेली का इतिहास

इमलीखेड़ा की इस हवेली का इतिहास वर्ष 1919 में कुख्यात डाकू सुल्ताना द्वारा यहां लूट की वारदात किए जाने के चर्चित प्रसंग से भी जुड़ा बताया जाता है। वर्षों पुरानी यह हवेली अपने विशाल आकार, कमरों की संख्या और ऐतिहासिक कहानियों के कारण क्षेत्र में लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है। हालांकि, इस घटना से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि किया जाना आवश्यक है।
इमलीखेड़ा की पहचान से जुड़ी है ऐतिहासिक धरोहर

सांसद प्रतिनिधि विक्रम गर्ग की हवेली का यह भ्रमण इमलीखेड़ा की ऐतिहासिक विरासत को सामने लाने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। ऐसी पुरानी इमारतें केवल निर्माण कला का उदाहरण नहीं होतीं, बल्कि अपने दौर की सामाजिक, सांस्कृतिक और स्थानीय परंपराओं की कहानी भी बयां करती हैं।
हवेली की भव्यता और उससे जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग इमलीखेड़ा के अतीत की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसी धरोहरों के इतिहास का दस्तावेजीकरण और संरक्षण किया जाए, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।




