इमलीखेड़ा (हरिद्वार)। नगर पंचायत इमलीखेड़ा क्षेत्र में परिवहन विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग की कार्रवाई में छोटे वाहन चालकों पर तो सख्ती दिखाई जा रही है, लेकिन मिट्टी से भरे डंपरों के मामले में अपेक्षित कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही है।

लोगों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि नियमों का उल्लंघन करने पर एक डंपर को सीज किया गया है, तो क्षेत्र में मिट्टी से भरे अन्य डंपरों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? आखिर कितने डंपरों की जांच हुई और कितने वाहनों पर चालान या सीज करने की कार्रवाई की गई?
स्थानीय लोगों का कहना है कि गरीब व्यक्ति के ट्रैक्टर पर कार्रवाई करने में विभाग तत्परता दिखाता है, लेकिन भारी वाहनों की जांच और कार्रवाई को लेकर पारदर्शिता भी सामने आनी चाहिए। लोगों ने परिवहन विभाग से मांग की है कि क्षेत्र में चल रहे मिट्टी से भरे सभी डंपरों की निष्पक्ष जांच की जाए। वाहनों के दस्तावेज, ओवरलोडिंग, परमिट और अन्य जरूरी नियमों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक डंपर सीज होने के बाद बाकी डंपर कहां गए और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? क्या विभाग ने सभी वाहनों की जांच की या कार्रवाई केवल एक वाहन तक ही सीमित रही?

स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करने और बिना किसी भेदभाव के नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखना होगा कि परिवहन विभाग इन सवालों का जवाब देता है या फिर क्षेत्र में मिट्टी से भरे डंपरों का संचालन इसी तरह जारी रहता है।




