इमलीखेड़ा। नगर पंचायत इमलीखेड़ा में जलभराव की समस्या के समाधान के लिए उच्च अधिकारियों ने क्षेत्र का निरीक्षण किया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि स्थानीय सभासदों को इसकी कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। इस घटना ने प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सभासद जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं। वे अपने वार्ड की समस्याओं और लोगों की परेशानियों से भली-भांति परिचित होते हैं। ऐसे में यदि निरीक्षण और निर्णय प्रक्रिया से उन्हें दूर रखा जाता है, तो यह न केवल जनप्रतिनिधियों की भूमिका को कमजोर करता है बल्कि जनता की आवाज़ को भी नज़रअंदाज़ करने जैसा माना जा सकता है।
क्षेत्र में चर्चा है कि जब जनता की समस्याओं के समाधान की बात हो, तो प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि यदि सभासदों को ही सूचना नहीं दी जाएगी, तो वे अपने क्षेत्र की समस्याओं और जनता की मांगों को अधिकारियों के सामने कैसे रख पाएंगे?
अब लोगों की मांग है कि भविष्य में नगर पंचायत से जुड़े किसी भी निरीक्षण, विकास कार्य या समीक्षा बैठक की सूचना सभी सभासदों को समय पर दी जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और जनता की समस्याओं का समाधान सभी पक्षों की सहभागिता से हो सके।




