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गन्ना भुगतान समेत किसानों की कई मांगों पर आर-पार की तैयारी, 24 सितंबर को देहरादून में मुख्यमंत्री आवास घेरेंगे किसान भारतीय किसान यूनियन क्रांति राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास सैनी

 

 

 

 

देहरादून। गन्ना भुगतान समेत किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन (क्रांति) ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। संगठन की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार 24 सितंबर को बड़ी संख्या में किसान देहरादून पहुंचकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। किसान सुबह 10 बजे परेड ग्राउंड में एकत्र होंगे, जिसके बाद आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। 

आंदोलन के केंद्र में इकबालपुर चीनी मिल से जुड़ा गन्ना भुगतान प्रमुख मुद्दा है। संगठन का दावा है कि इकबालपुर मिल पर पिछले चार साल का करीब 135 करोड़ रुपये तथा हरियाणा के किसानों का करीब 40 करोड़ रुपये गन्ना भुगतान बकाया है। किसानों ने इस भुगतान को तत्काल कराने की मांग उठाई है। 

 

इकबालपुर मिल सरकार चलाए—किसानों की मांग

किसान संगठन ने मांग की है कि इसी सत्र में इकबालपुर मिल को सरकार अपने नियंत्रण में लेकर संचालित करे, ताकि किसानों के गन्ने का भुगतान समय पर सुनिश्चित हो सके। इकबालपुर मिल के भुगतान का मुद्दा पहले भी किसानों के आंदोलनों और न्यायिक कार्यवाही का विषय रहा है। 

 

बिजली और स्मार्ट मीटर का भी मुद्दा

 

किसानों ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जाने तथा किसानों के नलकूपों की बिजली निशुल्क किए जाने की मांग भी रखी है। इसके साथ ही उत्तराखंड में एक समान नियम लागू करने अथवा हरिद्वार जिले को केंद्र शासित किए जाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने की मांग भी पोस्टर में शामिल है। 

 

17 सितंबर को इकबालपुर मिल पहुंचने का आह्वान

 

संगठन ने गन्ने का भुगतान बकाया होने वाले किसानों से 17 सितंबर को इकबालपुर मिल पहुंचने का आह्वान किया है। इसके बाद 24 सितंबर को देहरादून में प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव को आंदोलन की अगली बड़ी कड़ी माना जा रहा है। 

 

इकबालपुर मिल के भुगतान को लेकर किसानों का असंतोष नया नहीं है। इससे पहले भी बकाया भुगतान को लेकर किसान आंदोलन कर चुके हैं और सितंबर 2025 में आंदोलन के दौरान मिल प्रबंधन की ओर से 4.55 करोड़ रुपये का चेक जारी किए जाने की खबर सामने आई थी। 

 

किसान संगठन का कहना है कि जब तक किसानों के बकाये का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। पोस्टर में संगठन ने स्पष्ट संदेश दिया है—“हर जोर-जुल्म की टक्कर पर संघर्ष हमारा नारा है।” 

 

नोट: 135 करोड़ और 40 करोड़ रुपये के बकाये के आंकड़े संगठन के पोस्टर में दिए गए दावे हैं; इसलिए समाचार में इन्हें “संगठन के अनुसार” लिखना उचित रहेगा।

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