उत्तराखंडरूडकीहरिद्वार

पिरान कलियर दरगाह कार्यालय से जुड़ा विवाद पहुंचा जिलाधिकारी की चौखट तक

 

 

पिरान कलियर। दरगाह कार्यालय की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की छवि से जुड़े विवाद ने अब प्रशासनिक स्तर पर दस्तक दी है। नगर पंचायत पिरान कलियर निवासी मुनताज ने जिलाधिकारी हरिद्वार को शिकायत भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

 

शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में पूर्व कर्मचारी सलीम अहमद उर्फ बिल्ला तथा कथित पत्रकार इंतजार रजा का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया है कि दरगाह से संबंधित पुरानी एवं जांचाधीन सामग्री को बार-बार सोशल मीडिया और विभिन्न न्यूज पोर्टलों पर प्रसारित किया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पूर्व में भी दरगाह से जुड़ा एक ऑडियो सोशल मीडिया एवं समाचार पोर्टलों पर सामने आया था, जिसको लेकर मामला जांच के स्तर पर बताया जा रहा है।

 

जांच पूरी होने से पहले सामग्री प्रसारित करने पर सवाल

 

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब संबंधित मामला सक्षम स्तर पर जांच के दायरे में है, तो जांच पूरी होने से पहले उसी सामग्री को बार-बार सार्वजनिक किए जाने से लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे दरगाह कार्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की छवि प्रभावित होने की आशंका भी शिकायत में जताई गई है।

 

पूर्व कर्मचारी के निलंबन का भी किया उल्लेख

 

शिकायत में पूर्व कर्मचारी सलीम अहमद उर्फ बिल्ला के निलंबन का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि पूर्व में उन पर ठेकेदारों से कथित रूप से अवैध धनराशि मांगने और उगाही से जुड़े आरोप लगे थे, जिसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई की गई थी। शिकायत में वर्ष 2021 में हुए निलंबन का भी जिक्र किया गया है।

 

निष्पक्ष जांच की मांग

 

शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि जांचाधीन सामग्री को लगातार सार्वजनिक किए जाने के पीछे किसी प्रकार का दबाव बनाने या कथित ब्लैकमेलिंग जैसी स्थिति पैदा करने का प्रयास हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

 

मुनताज ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने और जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

 

गौरतलब है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोप फिलहाल शिकायतकर्ता के दावे हैं। संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने तथा प्रशासनिक एवं पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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