इमलीखेड़ा/रुड़की। नगर पंचायत इमलीखेड़ा स्थित चौकी के पास लगे सीसीटीवी कैमरों को लेकर क्षेत्र में एक बड़ा सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कैमरों की नजर में आम जनता के दोपहिया और चारपहिया वाहन तो तुरंत आ जाते हैं और उनके चालान भी काट दिए जाते हैं, लेकिन दिन-रात सड़कों पर दौड़ रहे कथित ओवरलोड और अवैध खनन से जुड़े डंपर आखिर इन कैमरों की पकड़ से कैसे बच जाते हैं?

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि इमलीखेड़ा मार्ग से गुजरने वाले कई डंपर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते दिखाई देते हैं। ओवरलोडिंग के कारण जहां सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, वहीं दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद इन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई न होने से लोगों में नाराजगी है।
लोगों का कहना है कि यदि सीसीटीवी कैमरों का उद्देश्य यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करना है, तो फिर कार्रवाई केवल आम नागरिकों तक ही सीमित क्यों दिखाई देती है? क्या नियम और कानून सभी के लिए समान नहीं होने चाहिए?
अब सवाल यह उठता है कि जब कैमरे हर गतिविधि को रिकॉर्ड कर रहे हैं, तो ओवरलोड डंपरों की तस्वीरें और उनकी आवाजाही संबंधित विभागों की नजर में क्यों नहीं आ रही? क्या जिम्मेदार विभाग इस ओर ध्यान देंगे या फिर आम जनता के मन में उठ रहे ये सवाल यूं ही अनुत्तरित रह जाएंगे?
क्षेत्रवासियों ने परिवहन विभाग, आरटीओ और प्रशासन से मांग की है कि सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से सभी वाहनों की समान रूप से निगरानी कर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की जाए, ताकि कानून का राज केवल कागजों तक सीमित न रहे।




