। हरिद्वार यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों एवं माननीय शिक्षकों ने सोमवार को अपना घर आश्रम, रुड़की पहुंचकर वहां निवास कर रहे प्रभुजनों के साथ आत्मीय समय बिताया। विद्यार्थियों ने प्रभुजनों से बातचीत कर उनका हाल-चाल जाना और उनके साथ हंसी-खुशी के पल साझा किए। विद्यार्थियों के आगमन से आश्रम में काफी देर तक खुशी और अपनत्व का माहौल बना रहा।

आश्रम में रहने वाले कई प्रभुजन ऐसे हैं, जिनके जीवन में उनका अपना परिवार आज उनके साथ नहीं है। ऐसे में जब कोई उनसे मिलने पहुंचता है तो उन्हें अपनेपन का एहसास होता है। हरिद्वार यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने भी प्रभुजनों के पास बैठकर उनकी बातें सुनीं और उनके साथ समय बिताया। किसी ने हाथ थामा तो किसी ने मुस्कुराकर बातचीत की। इन छोटे-छोटे पलों ने प्रभुजनों के चेहरों पर खुशी ला दी।

विद्यार्थियों ने कहा कि आश्रम में आकर प्रभुजनों के साथ समय बिताना उनके लिए भी बेहद भावुक और सीख देने वाला अनुभव रहा। उन्होंने महसूस किया कि समाज सेवा केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी अकेले व्यक्ति को अपना समय देना, उसकी बात सुनना और उसे सम्मान एवं अपनापन महसूस कराना भी सेवा का महत्वपूर्ण रूप है।
प्रभुजनों के साथ बांटी खुशियां

इस दौरान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने प्रभुजनों के साथ खुशियां साझा करते हुए उन्हें केले वितरित किए। फल पाकर प्रभुजनों के चेहरे खिल उठे। विद्यार्थियों ने उनके साथ बातचीत करते हुए उन्हें परिवार जैसा अपनापन देने का प्रयास किया।
वृक्षारोपण से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के दौरान हरिद्वार यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने अपना घर आश्रम परिसर में वृक्षारोपण भी किया। पौधे लगाकर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों ने कहा कि पेड़-पौधे आने वाली पीढ़ियों के लिए अनमोल धरोहर हैं, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए।
कुछ घंटों का अपनापन बन गया यादगार पल
हरिद्वार यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों और अपना घर आश्रम के प्रभुजनों के बीच हुई यह मुलाकात एक सामान्य कार्यक्रम से कहीं बढ़कर रही। इसने समाज को यह संदेश दिया कि रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान और संवेदना से भी बनते हैं। जिन लोगों के जीवन में अपनों की कमी है, उनके साथ कुछ पल बिताना भी उनके लिए बहुत बड़ी खुशी हो सकती है।
इस अवसर पर अपना घर आश्रम, रुड़की परिवार की ओर से हरिद्वार यूनिवर्सिटी के सभी विद्यार्थियों एवं माननीय शिक्षकों का प्रेम, संवेदना और आत्मीय समय देने के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया गया।

कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि समाज में जरूरतमंद और बेसहारा लोगों के साथ खड़े होकर उनके जीवन में खुशियों की छोटी-सी किरण भी लाई जा सकती है। किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए हमेशा बड़ी मदद की जरूरत नहीं होती, कभी-कभी सच्चे मन से दिया गया थोड़ा-सा समय और अपनापन ही सबसे बड़ी सेवा बन जाता है।



