नगर पंचायत क्षेत्र के माजरी गांव में पिछले 15-20 दिनों से जारी खनन कार्य अब ग्रामीणों के लिए चिंता नहीं, बल्कि डर का कारण बन चुका है। हालात इतने भयावह हो गए हैं कि खेत में लगा सरकारी नल जमीन छोड़कर हवा में झूल रहा है, जबकि कई बिजली के खंभों की नींव तक खोद डाली गई है। गांव वालों का कहना है कि बरसात की पहली तेज बारिश ही किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है।
ग्रामीणों के मुताबिक खनन के दौरान नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर मिट्टी निकाली गई है। नतीजा यह है कि सरकारी संपत्तियां खतरे में पड़ गई हैं। गांव में लगे करीब चार से पांच बिजली के खंभों के नीचे से मिट्टी हट चुकी है, जिससे उनकी पकड़ कमजोर हो गई है। यदि ये खंभे गिरते हैं तो न केवल बिजली व्यवस्था ठप होगी, बल्कि किसी की जान भी जा सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकारी नल हवा में लटका दिखाई दे रहा है, बिजली के खंभे खतरे में हैं और ग्रामीण लगातार शिकायत कर रहे हैं, तब भी संबंधित विभाग और प्रशासन आखिर किस बात का इंतजार कर रहे हैं?
ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि खनन कार्य दिन-रात जारी रहा, लेकिन किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर हालात जानने की जरूरत तक नहीं समझी। लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो बरसात में मिट्टी धंसने, खंभे गिरने और बड़े नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
आखिर जिम्मेदार कौन?
🔴 सरकारी संपत्तियों को खतरे में डालने की अनुमति किसने दी?
🔴 बिजली के खंभों की नींव काटे जाने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
🔴 क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
🔴 अगर कल कोई जनहानि होती है तो जवाबदेह कौन होगा?
अब प्रशासन की परीक्षा
माजरी गांव के लोग मांग कर रहे हैं कि तत्काल खनन स्थल की जांच कराई जाए, खतरे में पड़े बिजली के खंभों को सुरक्षित किया जाए और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। क्योंकि अगर आज भी जिम्मेदार नहीं जागे, तो कल होने वाले किसी हादसे की गूंज सीधे प्रशासनिक दफ्तरों तक पहुंचेगी।
“सरकारी नल हवा में झूल रहा है, बिजली के खंभे गिरने की कगार पर हैं… फिर भी जिम्मेदार खामोश हैं। सवाल यह नहीं कि हादसा होगा या नहीं, सवाल यह है कि हादसे से पहले प्रशासन जागेगा या बाद में?”
— जनता की आवाज, सच के साथ




