हरिद्वार के गंगा घाट बनते जा रहे “चौपाटी”, आखिर कब जागेगा नगर निगम?
धर्मनगरी Haridwar की पहचान उसकी पवित्र गंगा और आस्था से जुड़े घाट हैं, लेकिन आज इन्हीं घाटों का स्वरूप धीरे-धीरे एक “चौपाटी” में बदलता दिखाई दे रहा है। गंगा किनारे बढ़ती अव्यवस्था, जगह-जगह लग रही अस्थायी दुकानें, फैलता कूड़ा-कचरा और अनियंत्रित भीड़ श्रद्धालुओं की आस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
हर की पैड़ी से लेकर अन्य घाटों तक शाम होते ही कई स्थानों पर ऐसा माहौल बन जाता है मानो कोई पर्यटन चौपाटी हो। खाने-पीने के ठेले, प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग और घाटों पर फैलती गंदगी गंगा की पवित्रता को प्रभावित कर रही है। श्रद्धालु भी इस स्थिति को देखकर चिंता जता रहे हैं कि जिस स्थान पर लोग श्रद्धा और शांति की भावना से आते हैं, वहां अब अव्यवस्था का माहौल बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये घाटों के सौंदर्यीकरण और स्वच्छता पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही दिखाई देती है। गंगा घाटों पर नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई की कमी के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
अब समय आ गया है कि Haridwar Municipal Corporation और प्रशासन इस गंभीर विषय पर तुरंत संज्ञान ले। घाटों पर अतिक्रमण रोकने, स्वच्छता बनाए रखने और धार्मिक गरिमा को सुरक्षित रखने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
क्योंकि हरिद्वार सिर्फ एक शहर नहीं, करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो आने वाले समय में गंगा घाटों की पहचान और पवित्रता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
जनभावना यही कह रही है — गंगा घाटों को चौपाटी नहीं, आस्था का केंद्र ही रहने दिया जाए।




