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शोध समस्या से प्रस्ताव तक: केस-आधारित अधिगम ही आत्मनिर्भर भारत की कुंजी है” प्रो० (डॉ०) नरेंद्र शर्मा

 

 

मदरहुड विश्वविद्यालय रुड़की के अनुसंधान एवं विकास शेल, के द्वारा आज विश्वविद्यालय में “शोध समस्या की पहचान से शोध प्रस्ताव विकास तक, केस-आधारित अधिगम दृष्टिकोण” विषय पर एक दिवसीय विशेषज्ञ सत्र का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को अनुसंधान की मूलभूत समझ प्रदान करना था, उनमें शोध समस्या पहचानने और प्रस्ताव लिखने की क्षमता विकसित करना तथा अनुसंधान एवं नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलपति व मुख्य अतिथि के द्वारा दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुई।

कार्यक्रम में शामिल सभी अतिथियों का स्वागत डॉ० सुप्रिया दुबे के द्वारा किया गया। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय ने कहा, “हम 21वीं सदी में जी रहे हैं। यहाँ डिग्री के साथ-साथ शोध कौशल भी जरूरी है। आज का युग डेटा और साक्ष्य आधारित निर्णयों का युग है। हमारे छात्रों को सिर्फ जानकारी लेने वाले नहीं, बल्कि नई समस्या की पहचान कर समाधान देने वाले शोधकर्ता बनना होगा। डॉ. त्यागी जैसे शोध विशेषज्ञों का मार्गदर्शन हमारे छात्रों के लिए प्रेरणा है। विश्वविद्यालय भविष्य में भी ऐसे सत्र आयोजित करता रहेगा ताकि हमारे छात्र अकादमिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनें। शोध समस्या से शोध प्रस्ताव तक की यात्रा में दक्षता ही आत्मनिर्भर भारत की कुंजी है।”

 

इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. ए.के. त्यागी, हेड – डेरिवेटिव रिसर्च, धनमित्रा इंफोटेक एलएलपी एवं संस्थापक – इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल रिसर्च (IFR) रहे। डॉ. त्यागी एक ख्याति प्राप्त शोधकर्ता, अकादमिक प्रशिक्षक एवं शिक्षाविद हैं। प्रबंधन में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त डॉ. त्यागी उच्च शिक्षा, अनुसंधान प्रबंधन, डेटा विश्लेषण और उद्योग-शिक्षा भागीदारी में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल रिसर्च की स्थापना की है जो केस-आधारित अधिगम, अनुसंधान पद्धति, डेटा एनालिटिक्स और एआई-आधारित शोध उपकरणों के क्षेत्र में कार्यरत है। वे NAAC, गुणवत्ता पहल, पाठ्यक्रम विकास और फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में भी विशेषज्ञता रखते हैं। मार्केटिंग, बैंकिंग, उपभोक्ता व्यवहार एवं प्रबंधन पर उनके कई शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं।

 

अपने सत्र में डॉ. त्यागी ने 5 मॉड्यूल के माध्यम से केस-आधारित अधिगम कराया आर्किटेक्चर मॉड्यूल 1 मे अनुसंधान पद्धति की नींव एवं शोध का अर्थ, महत्व, प्रकार, शोध प्रक्रिया और शोध नैतिकता को केस उदाहरणों के साथ समझाया। मॉड्यूल 2 में अनुसंधान समस्या निरूपण और साहित्य समीक्षा में उन्होंने बताया कि कैसे शोध अंतराल की पहचान करें, साहित्य की समीक्षा करें, उद्देश्य और परिकल्पना तैयार करें।  

मॉड्यूल 3 में अनुसंधान डिजाइन और पद्धति में मात्रात्मक, गुणात्मक और मिश्रित विधियों, नमूनाकरण तकनीक और डेटा संग्रह उपकरणों पर चर्चा की।  

मॉड्यूल 4 और 5 में व्यावहारिक शोध प्रस्ताव लेखन में उन्होंने छात्रों को एक शोध विचार से पूर्ण शैक्षणिक प्रस्ताव तैयार करना सिखाया। एआई उपकरणों का उपयोग कर डेटा विश्लेषण को कैसे तेज और सटीक बनाया जाए, यह भी लाइव डेमो के साथ दिखाया। उन्होंने कहा कि “एक अच्छा शोध प्रस्ताव केवल दस्तावेज नहीं है, यह समस्या समाधान की रोडमैप है। जो इसे बनाना सीख जाता है, वह भविष्य की चुनौतियों का उत्तर दे सकता है।”

 

निदेशक, अनुसंधान प्रो. (डॉ.) पी.के. अग्रवाल ने कहा कि अनुसंधान और उद्योग का तालमेल आज समय की मांग है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि केस स्टडी, डेटा विश्लेषण और शोध पद्धति पर काम करें। उन्होंने IFR के साथ शोध और FDP के लिए MoU की संभावना पर भी चर्चा की।

पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. प्रियंका दानई के द्वारा किया गया। उनके कुशल संचालन से कार्यक्रम अत्यंत रोचक और जानकारीपूर्ण बना। 

 

अंत में प्रो. सीमा तोमर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने मुख्य वक्ता डॉ. ए.के. त्यागी, माननीय कुलपति, निदेशक अनुसंधान, सभी फैकल्टी सदस्यों, विद्यार्थियों एवं आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल मदरहुड विश्वविद्यालय रुड़की, मीडिया कवरेज कमेटी सदस्य असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विवेक कुमार ने बताया कि आज के युग में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। यदि छात्रों को शोध पद्धति, साहित्य समीक्षा और प्रस्ताव लेखन का व्यावहारिक ज्ञान होगा तो वे न केवल उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसर प्राप्त करेंगे बल्कि समाज और उद्योग की वास्तविक समस्याओं का समाधान भी दे सकेंगे। इस कार्यक्रम में 100 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। छात्रों ने शोध समस्या निर्माण, साहित्य समीक्षा, प्रस्ताव लेखन और AI टूल्स से जुड़े कई प्रश्न पूछे। कई छात्रों ने कहा कि यह सत्र उनके लिए आंखें खोलने वाला था और अब वे शोध और उच्च शिक्षा में करियर बनाने के बारे में गंभीरता से सोचेंगे।

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