इमलीखेड़ा (हरिद्वार)। इमलीखेड़ा चौकी क्षेत्र में किसानों के ट्यूबवेल चोरों के निशाने पर हैं। खेतों में सिंचाई के लिए लगाए गए ट्यूबवेलों से मोटर और स्टार्टर उखाड़कर चोरी किए जाने की घटनाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मेहनत की कमाई से खेती करने वाले किसानों को अब फसल की सिंचाई के साथ-साथ अपने कृषि उपकरणों की सुरक्षा की भी चिंता सताने लगी है।
सवाल यह है कि आखिर किसानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? जब खेतों में लगे ट्यूबवेल ही सुरक्षित नहीं हैं, तो किसान अपनी मेहनत और संसाधनों की सुरक्षा की उम्मीद किससे करें? चोरी की घटनाओं से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, वहीं समय पर सिंचाई न हो पाने से फसलों पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।
क्षेत्र में चोरी की घटनाओं को लेकर पुलिस की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। किसानों को राहत देने के लिए जरूरी है कि चोरी की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए, घटनास्थलों की जांच हो और आरोपियों की पहचान कर चोरी गए सामान की बरामदगी के प्रयास किए जाएं।
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या किसानों को यूं ही नुकसान उठाते रहना पड़ेगा, या शासन-प्रशासन इस समस्या पर ठोस कार्रवाई करेगा? किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सुरक्षा और कार्रवाई के रूप में नतीजे चाहिए। संबंधित अधिकारियों को मामले का संज्ञान लेकर प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि किसानों को बार-बार ऐसी घटनाओं का सामना न करना पड़े।




