रुड़की। रुड़की विधानसभा की सियासत में एक नए नाम की चर्चा ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। पूर्व प्रेस क्लब अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार दीपक शर्मा के आगामी विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरने की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। यदि दीपक शर्मा चुनावी मैदान में उतरते हैं, तो मुकाबले में एक ऐसा चेहरा दिखाई देगा जिसकी पहचान लंबे समय से पत्रकारिता और जनसरोकारों से जुड़ी रही है।

दीपक शर्मा पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए विभिन्न जनमुद्दों को उठाते रहे हैं। प्रेस क्लब अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने पत्रकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी भूमिका निभाई। अब राजनीति में उनकी संभावित एंट्री को लेकर रुड़की विधानसभा क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
पत्रकारिता से राजनीति तक—क्या बदलेगा रुड़की का चुनावी समीकरण?
दीपक शर्मा यदि चुनाव लड़ने का निर्णय लेते हैं, तो उनका पत्रकारिता का अनुभव उन्हें जनता के बीच अपनी बात रखने का अलग मंच दे सकता है। जनसमस्याओं, स्थानीय मुद्दों और क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियों की लंबे समय से रिपोर्टिंग करने के कारण उन्हें क्षेत्र के मुद्दों की अच्छी समझ होने का दावा उनके समर्थकों की ओर से किया जा रहा है।
इसी बीच उनके समर्थकों के बीच “एक पत्रकार, सब पर भारी” जैसे नारे भी सुनने को मिल रहे हैं। हालांकि, यह समर्थकों की प्रतिक्रिया है और दीपक शर्मा की ओर से चुनाव लड़ने की औपचारिक घोषणा होना अभी बाकी है।
मैदान में उतरे तो मुकाबला होगा दिलचस्प
रुड़की विधानसभा में दीपक शर्मा के संभावित चुनाव लड़ने की चर्चा ने राजनीतिक समीकरणों पर बहस शुरू कर दी है। अलग-अलग राजनीतिक दलों और संभावित दावेदारों के बीच इस नए नाम को लेकर चर्चाएं होने लगी हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पूर्व प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक शर्मा पत्रकारिता की दुनिया से निकलकर सीधे चुनावी मैदान में उतरेंगे?
अगर उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया, तो रुड़की विधानसभा में पत्रकारिता से राजनीति तक का यह सफर निश्चित रूप से चुनावी चर्चा का एक प्रमुख विषय बन सकता है।

फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन दीपक शर्मा के संभावित चुनावी मैदान में उतरने की चर्चा ने रुड़की की सियासत में हलचल जरूर पैदा कर दी है।




