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मैकाले की गुलामी वाली शिक्षा से मुक्ति का मार्ग है भारतीय शिक्षा बोर्ड, इसमें शिक्षकों की होगी अहम भूमिका: स्वामी रामदेव 

ऐसे बच्चे तैयार करेंगे जो भविष्य में राष्ट्र निर्माण के सशक्त वाहक बनेंगे: एनपी सिंह

 

 भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी) भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिक्षा प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। इसी क्रम में बोर्ड की ओर से दो चरणों में आयोजित प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से देश के पांच राज्यों के शिक्षकों को कौशल आधारित एवं भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा के विभिन्न आयामों का प्रशिक्षण दिया गया।

भारतीय शिक्षा बोर्ड द्वारा हरिद्वार जोन के अंतर्गत कन्या गुरुकुल हरिद्वार में आयोजित यह प्रशिक्षण दो चरणों में संपन्न हुआ। प्रथम चरण 20 एवं 21 जून को कक्षा 1 से 5 तक के शिक्षकों के लिए तथा द्वितीय चरण 23 एवं 24 जून को कक्षा 6 से 8 तक के शिक्षकों के लिए आयोजित किया गया। प्रशिक्षण शिविर में उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, असम, हरियाणा एवं हिमाचल प्रदेश से आए 250 से अधिक शिक्षकों ने सहभागिता की।

दोनों चरणों में भारतीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एन.पी. सिंह ने शिक्षकों को कौशल आधारित शिक्षा (स्किल-बेस्ड एजुकेशन), भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के समन्वय पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड की स्थापना का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख शिक्षा देना नहीं, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और जीवन कौशल से जोड़ते हुए उत्कृष्ट व्यक्तित्व का निर्माण करना है। ऐसे विद्यार्थी भविष्य में राष्ट्र निर्माण के सशक्त वाहक बनेंगे और विकसित एवं वैभवशाली भारत के निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभाएंगे।

प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर परम पूज्य स्वामी रामदेव ने सभी शिक्षकों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए उन्हें पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और समाज के निर्माण में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसलिए प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और अनुभव को विद्यालयों तक पहुंचाकर शिक्षकों को समर्थ, संस्कारित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत को औपनिवेशिक मानसिकता और मैकाले की शिक्षा व्यवस्था से वास्तविक मुक्ति भारतीय शिक्षा बोर्ड जैसी व्यवस्था ही दिला सकती है। उन्होंने कहा कि इस परिवर्तन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी शिक्षकों के कंधों पर है। शिक्षक ही आने वाली पीढ़ी की नींव रखते हैं, इसलिए उन्हें ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना होगा जो ज्ञान, संस्कार, कौशल और राष्ट्रभावना से समृद्ध हों तथा भारत को विश्वगुरु बनाने के संकल्प को साकार करें। प्रशिक्षण के दौरान हिंदी, अंग्रेजी, बाल वाटिका, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत तथा ‘द वर्ल्ड अराउंड अस’ विषयों पर दिल्ली, मेरठ, मोदीनगर, देहरादून और हल्द्वानी से आए रिसोर्स पर्सन्स ने शिक्षकों को महत्वपूर्ण जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान किया। इस दौरान प्रशिक्षण एवं गुरुकुल शिक्षा सलाहकार वंदना पांडे सहित बोर्ड के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहें।

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