रुड़की में स्थित “अपना घर आश्रम” में रविवार का दिन सेवा, समर्पण और इंसानियत की मिसाल बन गया। आश्रम का वातावरण उस समय भावुक और आनंदमय हो उठा, जब सत्येंद्र कुमार गुप्ता और नीरू मैम ने अपना जन्मदिन प्रभु जनों (जरूरतमंदों) के साथ बड़े प्रेम और आत्मीयता के साथ मनाया। इस विशेष अवसर पर आश्रम के दो वर्ष पूर्ण होने की खुशियां भी पूरे हर्षोल्लास के साथ साझा की गईं।

सुबह से ही आश्रम में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। हर ओर खुशियों की झलक और चेहरों पर मुस्कान साफ दिखाई दे रही थी। कार्यक्रम के दौरान प्रभु जनों के साथ नाच-गाना, भजन-कीर्तन और आत्मीय संवाद ने माहौल को पूरी तरह भावनात्मक बना दिया। सभी प्रभु जनों को अपने हाथों से खीर, बाटी, मिठाई और नाश्ता कराया गया, जो उनके लिए किसी उत्सव से कम नहीं था।
कार्यक्रम का सबसे खास और भावुक क्षण तब आया, जब केक काटकर जन्मदिन की खुशियां प्रभु जनों के साथ साझा की गईं। इस दौरान हर व्यक्ति के चेहरे पर जो सुकून और खुशी थी, वह इस आयोजन की सफलता को दर्शाने के लिए काफी थी।
सत्येंद्र कुमार गुप्ता का यह कदम समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है। उन्होंने अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर जिस तरह प्रभु जनों के साथ अपना विशेष दिन बिताया, वह उनके सेवा भाव, समर्पण और मानवता के प्रति सच्चे प्रेम को दर्शाता है। आज के समय में ऐसा उदाहरण बहुत कम देखने को मिलता है।
इस अवसर पर आश्रम के सेवा साथी सजीर खान, दीपेंद्र कुमार, बिट्टू, आर्यन कुशवाहा एवं कार्यालय प्रभारी गुलशन कुशवाहा की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी ने मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही आईआईटी रुड़की की सुंदरकांड टीम के सदस्यों ने भी अपनी सहभागिता निभाई और प्रभु जनों को अपने हाथों से भोजन कराकर सेवा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
आश्रम के स्टाफ और उपस्थित सभी लोगों ने मिलकर प्रभु जनों का आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे आयोजन में एक बात साफ दिखाई दी कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह दिलों को जोड़ने वाला एक भावनात्मक उत्सव था।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने ईश्वर से प्रार्थना की कि सत्येंद्र कुमार गुप्ता को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं निरंतर सेवा कार्य करने की शक्ति प्रदान करें।
“अपना घर आश्रम” में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक जन्मदिन समारोह रहा, बल्कि यह समाज के लिए एक सशक्त संदेश बन गया कि सच्ची खुशी दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने में ही होती है।




