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रुड़की में बेलगाम ई-रिक्शाओं से यातायात व्यवस्था बेपटरी! जाम में फंस रही जनता, नियमों के पालन पर उठे सवाल

* शहर की सड़कों पर बढ़ती ई-रिक्शाओं की संख्या और यातायात नियमों के कथित उल्लंघन से जाम की समस्या लगातार चिंता का विषय बनती जा रही है। बाजारों, चौराहों और प्रमुख मार्गों पर ई-रिक्शाओं की भीड़ के कारण यातायात प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब दोपहिया और चारपहिया वाहनों की जांच के लिए यातायात पुलिस सक्रिय है, तो ई-रिक्शाओं के संचालन को व्यवस्थित करने के लिए और प्रभावी कदम कब उठाए जाएंगे?

### दोपहिया-चारपहिया वाहनों की जांच, फिर ई-रिक्शाओं पर सख्ती कब?

 

यातायात पुलिस द्वारा वाहन चालकों के हेलमेट, ड्राइविंग लाइसेंस, पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी), बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र की जांच करना सड़क सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए की जा रही इस कार्रवाई की सराहना भी होनी चाहिए। लेकिन शहरवासियों का सवाल है कि यातायात नियमों का पालन सभी प्रकार के वाहनों से समान रूप से क्यों नहीं कराया जा रहा है?

### क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने पर लगाम जरूरी

 

शहर में कुछ ई-रिक्शाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाकर चलाने की शिकायतें सामने आती हैं। बच्चों समेत अधिक यात्रियों को बैठाकर वाहन चलाना दुर्घटना की स्थिति में गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। वहीं, अधिक चौड़ाई वाले ई-रिक्शाओं के कारण संकरे मार्गों पर यातायात प्रभावित होने की समस्या भी सामने आ रही है। ऐसे वाहनों की जांच कर नियमों के अनुरूप कार्रवाई करना जरूरी है।

 

### रोजगार का साधन भी, लेकिन सड़क सुरक्षा से समझौता नहीं

ई-रिक्शा गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण साधन हैं। आम नागरिक भी कम खर्च में इनसे सफर करते हैं। इसलिए उद्देश्य ई-रिक्शा चालकों को परेशान करना नहीं, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाना होना चाहिए। चालकों को यातायात नियमों की जानकारी देना, जरूरी दस्तावेजों की जांच करना, निर्धारित सवारी क्षमता का पालन कराना और प्रमुख मार्गों पर संचालन को व्यवस्थित करना समय की जरूरत है।

 

### प्रशासन से कार्रवाई की मांग

 

रुड़की के व्यस्त चौराहों, बाजारों और प्रमुख मार्गों पर ई-रिक्शाओं की नियमित निगरानी की जानी चाहिए। गलत दिशा में वाहन चलाने, निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने और जाम लगाने वाले वाहनों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हाईवे पर ई-रिक्शाओं का संचालन निर्धारित नियमों के अनुरूप ही हो।

 

**अब बड़ा सवाल यह है कि रुड़की की सड़कों को जाम से राहत कब मिलेगी?** क्या यातायात पुलिस ई-रिक्शाओं के संचालन को व्यवस्थित करने के लिए विशेष अभियान चलाएगी, या फिर आम जनता को रोजाना जाम की परेशानी से जूझना पड़ेगा? शहरवासियों को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी इस समस्या का गंभीरता से संज्ञान लेकर यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के

लिए ठोस कदम उठाएंगे।

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