मोहम्मदपुर पांडा, हरिद्वार।** राजनीति में अपनी ताकत का प्रदर्शन करना और चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करना आसान है, लेकिन जनता के बीच पहचान उन प्रयासों से बनती है, जिनका असर धरातल पर दिखाई देता है। ग्राम मोहम्मदपुर पांडा में श्मशान घाट की चारदीवारी का निर्माण अब क्षेत्र की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रमोद चौधरी (छपरा जी) के विशेष प्रयासों से जुड़े इस कार्य ने राजनीतिक सक्रियता और विकास के मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है।

## 4.60 लाख रुपये की लागत से बनी श्मशान घाट की चारदीवारी
राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल की निधि से ग्राम मोहम्मदपुर पांडा में श्मशान घाट की चारदीवारी का निर्माण कराया गया। शिलापट्ट के अनुसार, इस कार्य पर 4.60 लाख रुपये खर्च हुए। चारदीवारी की लंबाई 36.20 मीटर है। निर्माण कार्य 7 जुलाई 2026 को शुरू हुआ और 8 सितंबर 2026 को पूरा हुआ। इस निर्माण से श्मशान घाट परिसर की व्यवस्था बेहतर होने और स्थानीय लोगों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।

## ढोल-नगाड़ों से शक्ति प्रदर्शन या जनता के लिए विकास कार्य?
क्षेत्र की राजनीति में अब यह सवाल उठ रहा है कि नेताओं की असली पहचान किससे बनती है—समर्थकों की भीड़, ढोल-नगाड़ों और बड़े-बड़े दावों से या फिर जनता की जरूरतों के लिए किए गए प्रयासों से?

एक ओर राजनीतिक कार्यक्रमों में अपनी ताकत दिखाने की कोशिशें होती हैं, वहीं दूसरी ओर गांव की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य भी जनता का ध्यान आकर्षित करते हैं। मोहम्मदपुर पांडा में श्मशान घाट की चारदीवारी के निर्माण ने इसी अंतर को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
## विधानसभा संयोजक एवं पूर्व प्रत्याशी की भूमिका पर उठे सवाल
इस विकास कार्य के बाद विधानसभा संयोजक एवं पूर्व प्रत्याशी की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्षेत्र में राजनीतिक प्रभाव और सक्रियता दिखाने के साथ-साथ गांवों की बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता देना कितना जरूरी है।
राजनीति में किसी पद की अहमियत केवल उसके नाम से नहीं, बल्कि उससे जुड़ी जिम्मेदारियों और जनहित के लिए किए गए प्रयासों से भी आंकी जाती है। ऐसे में जब किसी गांव में विकास कार्य चर्चा में आता है, तो स्वाभाविक रूप से दूसरे राजनीतिक पदाधिकारियों की सक्रियता पर भी सवाल उठते हैं।
**कहीं ऐसा तो नहीं कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन की दौड़ में जनता की जरूरतों पर ध्यान देना पीछे छूट रहा है?** यह सवाल अब क्षेत्र की राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आने पर उसका पक्ष भी स्पष्ट हो सकेगा।
## जनता को चाहिए विकास, केवल चुनावी वादे नहीं
चुनाव के दौरान जनता से अनेक वादे किए जाते हैं, लेकिन लोगों की अपेक्षा रहती है कि गांव की सड़कें बेहतर हों, पेयजल की समस्या दूर हो, साफ-सफाई की व्यवस्था सुधरे और जरूरी सार्वजनिक सुविधाओं का विकास हो। जनता राजनीतिक दावों के साथ-साथ धरातल पर होने वाले कामों को भी महत्व देती है।

मोहम्मदपुर पांडा में श्मशान घाट की चारदीवारी का निर्माण एक सार्वजनिक सुविधा से जुड़ा कार्य है। इसने क्षेत्र में विकास कार्यों और राजनीतिक जिम्मेदारी को लेकर चर्चा को नया विषय दिया है। प्रमोद चौधरी (छपरा जी) के प्रयासों से जुड़े इस कार्य को लेकर समर्थकों में चर्चा है, जबकि विधानसभा संयोजक एवं पूर्व प्रत्याशी की भूमिका को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं।

### अब जनता पूछ रही है—ढोल-नगाड़ों का शोर बड़ा या विकास कार्यों का असर?
राजनीति में दावे करना आसान है, लेकिन जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना लगातार प्रयास मांगता है। मोहम्मदपुर पांडा की यह चर्चा एक बार फिर यही सवाल सामने लाती है कि राजनीतिक पहचान शक्ति प्रदर्शन से बनेगी या गांव की जरूरतों के लिए किए गए ठोस प्रयासों से।

**आखिरकार, जनता के बीच चर्चा उसी काम की होती है, जिसका लाभ लोगों तक पहुंचे।** अब देखना यह है कि क्षेत्र के राजनीतिक पदाधिकारी विकास और जनहित के मुद्दों पर अपनी सक्रियता किस तरह सामने रखते हैं।




