इमलीखेड़ा। नगर पंचायत इमलीखेड़ा के रजत जयंती पार्क की तस्वीर ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्क का विधिवत उद्घाटन तक नहीं हुआ और 24 घंटे के भीतर दूसरी बार चोरी की घटना सामने आ गई। लगातार दो वारदातों से स्थानीय लोगों में रोष है और नगर पंचायत प्रशासन से लेकर पुलिस महकमे तक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

सबसे हैरानी की बात यह है कि रजत जयंती पार्क इमलीखेड़ा पुलिस चौकी से महज करीब एक किलोमीटर की दूरी पर है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि जब पुलिस चौकी इतनी नजदीक है तो पार्क में लगातार चोरी कैसे हो रही है? क्या रात में गश्त हो रही है? क्या सार्वजनिक संपत्ति की निगरानी के लिए कोई व्यवस्था है? और पहली चोरी के बाद दूसरी वारदात को रोकने के लिए तत्काल कदम क्यों नहीं उठाए गए?
पहली चोरी के बाद भी नहीं जागा प्रशासन?
एक चोरी के बाद उसी पार्क में 24 घंटे के भीतर दूसरी घटना सामने आना सामान्य बात नहीं मानी जा सकती। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहली घटना के बाद पार्क की सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए थी, लेकिन दोबारा चोरी ने सुरक्षा इंतजामों की गंभीरता पर सवाल खड़ा कर दिया है।

उद्घाटन से पहले ही सरकारी संपत्ति पर संकट
जिस पार्क को आम जनता के लिए विकसित किया गया है, उसका उद्घाटन भी अभी नहीं हुआ था। ऐसे में उद्घाटन से पहले ही वहां चोरी की घटनाएं होना नगर पंचायत के लिए भी चिंता का विषय है। लोगों का कहना है कि यदि शुरुआत में ही पार्क सुरक्षित नहीं है तो भविष्य में इसकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
अब वरिष्ठ अधिकारियों से जवाबदेही की मांग
लगातार दूसरी चोरी के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और नगर पंचायत के उच्चाधिकारियों से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों की मांग है कि चोरी का जल्द खुलासा किया जाए, आरोपियों को पकड़ा जाए और पार्क में सीसीटीवी कैमरे, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था तथा नियमित रात्रि गश्त सुनिश्चित की जाए।
अब जनता का सीधा सवाल है—पहली चोरी के बाद भी अगर 24 घंटे के भीतर दूसरी चोरी हो गई, तो आखिर प्रशासन की निगरानी व्यवस्था कहां थी? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेंगे या सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा भी अगली वारदात का इंतजार करेगी?
लगातार हो रही चोरी ने इमलीखेड़ा की सुरक्षा व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब निगाहें पुलिस और नगर पंचायत प्रशासन की ठोस कार्रवाई पर टिकी हैं।




