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संवाद, संस्कार और सृजनात्मकता के साथ दीक्षा आरंभ संस्कार का समापन

 

रुड़की। सनातन धर्म प्रकाश चंद कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रुड़की में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉ. भारती शर्मा के दिशा-निर्देशन में आयोजित तीन दिवसीय दीक्षा आरंभ संस्कार का तृतीय एवं अंतिम दिवस विविध रचनात्मक, सांस्कृतिक और प्रेरणादायी गतिविधियों के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन समाजशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर अंजलि प्रसाद ने किया।

समापन दिवस की शुरुआत नवप्रवेशित छात्राओं के सपनों और आकांक्षाओं के संवाद से हुई। छात्राओं ने अपने भविष्य के लक्ष्यों को साझा करते हुए सिविल सर्विसेज, ड्राइंग, राजनीति विज्ञान और अंग्रेजी सहित विभिन्न क्षेत्रों में करियर बनाने की इच्छा व्यक्त की। वहीं एक छात्रा ने भावुक होकर कहा, “मैं अपना एक घर बनाना चाहती हूं, जहां मैं सुकून से रह सकूं।” छात्राओं के सपनों ने उनके आत्मविश्वास, सोच और भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को सामने रखा।

इसके बाद वरिष्ठ छात्राओं ने अपने तीन वर्षों के महाविद्यालयीन अनुभव नवप्रवेशित छात्राओं के साथ साझा किए। उन्होंने पढ़ाई के साथ सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों, व्यक्तित्व विकास और महाविद्यालय में उपलब्ध विभिन्न अवसरों का लाभ उठाने के लिए छात्राओं को प्रेरित किया।

 

कार्यक्रम में सांस्कृतिक समिति एवं भूतपूर्व छात्रा प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉ. अर्चना चौहान के संयोजन में भूतपूर्व छात्राओं का आत्मीय मिलन समारोह भी आयोजित किया गया। भूतपूर्व छात्राओं ने अपने अनुभव, वर्तमान कार्यक्षेत्र और उपलब्धियों को साझा करते हुए नई छात्राओं को बेहतर भविष्य के लिए मार्गदर्शन दिया। नगर निगम रुड़की से प्रियंका, राजनीति विज्ञान प्रवक्ता शबनम, मेकअप आर्टिस्ट मनीषा, वंशिका सहित अन्य भूतपूर्व छात्राओं की सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष बनाया।

 

वहीं अंग्रेजी विभाग की ओर से 1947 की विभाजन विभीषिका के पीड़ितों एवं विस्थापितों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रसिद्ध साहित्यकार सआदत हसन मंटो की कालजयी रचना ‘टोबा टेक सिंह’ पर आधारित फिल्म का प्रदर्शन किया गया। फिल्म के माध्यम से छात्राओं ने विभाजन की त्रासदी, विस्थापन, मानवीय पीड़ा और उस दौर की सामाजिक परिस्थितियों को समझा।

 

आजादी की लड़ाई में योगदान देने वाली विस्मृत महिला आंदोलनकारियों को स्मरण करते हुए भूमिका सिंह ने सावित्रीबाई फुले के जीवन एवं विचारों पर आधारित संवादात्मक नाट्य प्रस्तुति दी। प्रस्तुति ने छात्राओं को महिला शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और सामाजिक परिवर्तन के लिए सावित्रीबाई फुले के संघर्ष एवं योगदान से परिचित कराया।

 

समापन दिवस पर आयोजित मेहंदी प्रतियोगिता में छात्राओं ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। निर्णायक मंडल की प्रमुख डॉ. अलका आर्य ने परिणाम घोषित किए। प्रतियोगिता में साहिबा ने प्रथम, महक ने द्वितीय तथा भूमिका सिंघल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

 

इस अवसर पर डॉ. कामना जैन, अंशुल, डॉ. मधु मेहरा सहित महाविद्यालय के प्रवक्तागण उपस्थित रहे।

 

आशीर्वचन देते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अनुपमा गर्ग ने कहा कि दीक्षा आरंभ संस्कार केवल महाविद्यालय से परिचय का कार्यक्रम नहीं, बल्कि छात्राओं को अपने सपनों, क्षमताओं और लक्ष्यों को पहचानने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने छात्राओं से महाविद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक अवसरों का अधिकतम लाभ उठाते हुए आत्मविश्वास और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

 

तीन दिवसीय दीक्षा आरंभ संस्कार के दौरान आयोजित विभिन्न गतिविधियों ने नवप्रवेशित छात्राओं में संवाद, सहभागिता, सृजनात्मकता, संवेदनशीलता और आत्मविश्वास की भावना को मजबूत किया। कार्यक्रम ने छात्राओं को महाविद्यालयीन जीवन से जोड़ने के साथ-साथ अपने सपनों को पहचानने, लक्ष्य तय करने और उन्हें हासिल करने की प्रेरणा दी।

 

आत्मीयता, प्रेरणा, संवेदना और सकारात्मक ऊर्जा के साथ तीन दिवसीय दीक्षा आरंभ संस्कार का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

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