जिले की ग्राम पंचायतों और नगर पालिकाओं में सफाई व्यवस्था को लेकर एक बड़ा मामला सामने आने का दावा किया जा रहा है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार आरोप है कि कई स्थानों पर ऐसे लोग सफाईकर्मी के पद पर तैनात हैं जो खुद कभी झाड़ू तक नहीं लगाते। उनकी जगह प्राइवेट युवकों से सफाई कराई जाती है, जिन्हें केवल ₹8,000 से ₹10,000 प्रतिमाह देकर काम कराया जाता है, जबकि सरकारी वेतन किसी और के खाते में जाता है।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले को लेकर अब कुछ सफाई नायकों और कर्मचारियों ने खुलकर आवाज उठानी शुरू कर दी है। आरोप है कि कुछ लोग सत्ता से जुड़े प्रभावशाली व्यक्तियों और कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से वर्षों से इस व्यवस्था का फायदा उठा रहे हैं। इससे न केवल सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि वास्तविक सफाईकर्मियों के अधिकारों पर भी असर पड़ रहा है।
सूत्रों का दावा है कि इस कथित फर्जीवाड़े की शिकायत अब लखनऊ तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारी वेतन लेकर घरों में आराम करने वालों पर कार्रवाई होगी? क्या प्राइवेट कर्मचारियों के भरोसे चल रही यह व्यवस्था उजागर होगी? और क्या सरकार को होने वाले कथित नुकसान की भरपाई हो सकेगी?
*फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी*।




