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देव संस्कृति विश्वविद्यालय में प्रो. (डॉ.) नरेंद्र शर्मा की पुस्तक का लोकार्पण, कृषि शिक्षा और शोध को मिलेगी नई दिशा

 कृषिशिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मदरहुड विश्वविद्यालय, रुड़की के कुलपति प्रो. (डॉ.) नरेंद्र शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक ‘सब्जी फसलों के प्रमुख रोग, वैज्ञानिक निदान एवं समेकित प्रबंधन’ का देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार में भव्य समारोह के बीच लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक कृषि क्षेत्र से जुड़े विद्यार्थियों, शोधार्थियों, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों तथा किसानों के लिए एक उपयोगी एवं प्रमाणिक संदर्भ ग्रंथ के रूप में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पुस्तक का लोकार्पण देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष एवं प्रख्यात आध्यात्मिक चिंतक डॉ. चिन्मय पंड्या के करकमलों द्वारा किया गया। इस अवसर पर शिक्षा, अनुसंधान, भारतीय ज्ञान परंपरा और कृषि नवाचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर दोनों शिक्षाविदों के बीच विस्तृत एवं सार्थक चर्चा हुई।

 

कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि वर्तमान समय में कृषि शिक्षा को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। दोनों विश्वविद्यालयों के मध्य भविष्य में संयुक्त शोध परियोजनाओं, शैक्षणिक कार्यक्रमों, ज्ञान के आदान-प्रदान, फैकल्टी एक्सचेंज तथा नवाचार आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी सकारात्मक सहमति बनी।

प्रो. (डॉ.) नरेंद्र शर्मा ने कहा कि कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने से ही संभव है। उन्होंने कहा कि उनकी पुस्तक का उद्देश्य सब्जी फसलों में होने वाले प्रमुख रोगों की वैज्ञानिक जानकारी को सरल भाषा में विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और किसानों तक पहुंचाना है, ताकि वे आधुनिक एवं प्रभावी रोग प्रबंधन तकनीकों को अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।

 

वहीं डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था तभी अधिक प्रभावी बन सकती है, जब उसमें आधुनिक विज्ञान के साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और जीवन दर्शन का संतुलित समावेश हो। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के बीच इस प्रकार का शैक्षणिक सहयोग न केवल शोध और नवाचार को नई गति देगा, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

समारोह में उपस्थित शिक्षाविदों ने पुस्तक को कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान बताते हुए विश्वास जताया कि यह पुस्तक किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों के लिए समान रूप से लाभदायक सिद्ध होगी। कार्यक्रम का समापन शिक्षा, शोध, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के प्रति सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

 

 

विद्यार्थियों, शोधार्थियों और किसानों के लिए उपयोगी साबित होगी पुस्तक, भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर दिया गया जोर।

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