- कांवड़िए लौटे, पीछे छोड़ गए हजारों टन कचरा; सफाई कर्मचारियों ने संभाली धर्मनगरी की कमान
हरिद्वार। कांवड़ मेला समाप्त होने के बाद धर्मनगरी हरिद्वार में सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने की बड़ी जिम्मेदारी अब सफाई कर्मचारियों के कंधों पर है। कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही से शहर, कांवड़ मार्गों और घाटों पर जमा हुए भारी मात्रा में कचरे को हटाने के लिए सफाई कर्मचारी दिन-रात जुटे हुए हैं।
श्रद्धालु अपने गंतव्य की ओर रवाना हो चुके हैं, लेकिन सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी अभी खत्म नहीं हुई। गंगा घाटों से लेकर प्रमुख मार्गों और कांवड़ पटरी तक कर्मचारी लगातार कचरा एकत्र कर उसे निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने में लगे हैं। भारी मात्रा में जमा कचरे के बीच काम करना आसान नहीं है, लेकिन सफाई कर्मचारी बिना थके धर्मनगरी को फिर से स्वच्छ और सुंदर बनाने में जुटे हैं।
सफाई कर्मचारियों की मेहनत को सलाम
कांवड़ मेले की सफलता के पीछे पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ सफाई कर्मचारियों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच लगातार सफाई व्यवस्था बनाए रखना और मेला समाप्त होने के बाद जमा कचरे को हटाना अपने आप में बड़ी चुनौती है।
सफाई कर्मचारियों का कहना है कि हरिद्वार और मां गंगा को स्वच्छ रखना केवल उनकी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक की भी जिम्मेदारी है। यदि लोग कचरा निर्धारित स्थान पर डालें और प्लास्टिक का कम इस्तेमाल करें तो सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सकता है।
मेले के बाद भी सेवा में जुटे कर्मचारी
कांवड़ यात्रा खत्म होने के बाद जहां अधिकांश लोग अपने घरों को लौट गए, वहीं सफाई कर्मचारी धर्मनगरी की साफ-सफाई के लिए मैदान में डटे हैं। तेज धूप, गंदगी और लगातार काम के बावजूद कर्मचारियों की मेहनत से धीरे-धीरे घाटों और प्रमुख मार्गों की तस्वीर बदल रही है।
हरिद्वार की स्वच्छता के इन असली योद्धाओं को सलाम—इनकी मेहनत से ही श्रद्धा की नगरी फिर से स्वच्छ और सुंदर नजर आएगी।



