भारत को रक्षा एवं एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सोमवार को एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। PHIMACH Aerospace Pvt. Ltd., TIDES–IIT रुड़की तथा Doon Intellectual Property Solutions (DIPS) के मध्य बौद्धिक संपदा संरक्षण (Intellectual Property Protection) एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने हेतु समझौता ज्ञापन (MoU) पर औपचारिक हस्ताक्षर किए गए।
यह साझेदारी देश में स्वदेशी रक्षा तकनीक, एयरोस्पेस अनुसंधान और आधुनिक नवाचारों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने इसे “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को मजबूती देने वाला ऐतिहासिक कदम बताया।
PHIMACH Aerospace Pvt. Ltd. एक तेजी से उभरती हुई नवाचार आधारित कंपनी है, जो रक्षा प्रणालियों, मानव रहित हवाई प्रणालियों (UAVs) और अत्याधुनिक एयरोस्पेस तकनीकों के विकास पर कार्य कर रही है। कंपनी का लक्ष्य भारतीय तकनीक को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
समझौते के तहत DIPS द्वारा कंपनी को पेटेंट, कॉपीराइट, डिजाइन पंजीकरण और अन्य बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण के लिए तकनीकी एवं कानूनी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। इससे कंपनी के नवाचार सुरक्षित होंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी विस्तार को मजबूती मिलेगी।
MoU हस्ताक्षर समारोह में कंपनी के संस्थापक एवं CEO डॉ. महर्षि सुभाष, CTO डॉ. ऋद्धत्विक डोबरियाल, मुख्य अभियंता सुश्री वत्सला बर्थवाल तथा DIPS के Chief IP Officer डॉ. अनुज रतूड़ी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
यह समारोह हरिद्वार यूनिवर्सिटी के प्रो-वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. आदेश कुमार आर्य की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं बल्कि विश्वस्तरीय रक्षा और एयरोस्पेस तकनीकों का निर्माता बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भविष्य में स्वदेशी अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगी तथा भारत को वैश्विक एयरोस्पेस एवं रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।




