मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा सरकार उत्तराखंड को नशामुक्त बनाने के लिए लगातार अभियान चला रही है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि युवाओं को नशे से बचाना और नशे के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई करना प्राथमिकता है। लेकिन 15 अगस्त के राष्ट्रीय पर्व पर सामने आई कुछ तस्वीरों ने सरकार की नशामुक्ति मुहिम को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में सभासद प्रतिनिधि के नजदीक नशे के कारोबार से जुड़े बताए जाने वाले कुछ चेहरे मंच पर साथ नजर आए। तस्वीरें सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में चर्चा है कि जब सरकार नशे के खिलाफ सख्त अभियान चला रही है, तो ऐसे लोगों की जनप्रतिनिधियों के नजदीक सार्वजनिक मंच तक पहुंच आखिर कैसे हो रही है?
नशामुक्ति का संकल्प मंच से, लेकिन तस्वीरों ने पूछ लिया बड़ा सवाल
लोगों का कहना है कि नशा केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि युवाओं और परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इसलिए नशे के खिलाफ कार्रवाई बिना किसी दबाव और बिना किसी भेदभाव के होनी चाहिए।
हालांकि, सिर्फ किसी तस्वीर में मंच साझा करने के आधार पर किसी व्यक्ति को नशा माफिया कहना उचित नहीं है। यदि संबंधित लोगों के खिलाफ नशे के कारोबार से जुड़े ठोस तथ्य, शिकायतें या आपराधिक रिकॉर्ड हैं तो प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए।
शासन-प्रशासन से जनता की सीधी मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि 15 अगस्त की तस्वीरों से उठे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति वास्तव में नशे के कारोबार में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और यदि आरोप गलत हैं तो स्थिति भी स्पष्ट की जाए।
जनता पूछ रही है—एक तरफ नशामुक्त उत्तराखंड का संकल्प और दूसरी तरफ जनप्रतिनिधि के नजदीक नशे से जुड़े बताए जाने वाले चेहरों की मंच पर मौजूदगी, आखिर इस विरोधाभास की सच्चाई क्या है?
नशे के खिलाफ लड़ाई में किसी की पहुंच नहीं, सिर्फ कानून चले—तभी मुख्यमंत्री का नशामुक्त उत्तराखंड का संकल्प धरातल पर साकार होगा।




