इमलीखेड़ा। सावन का पावन महीना, सड़कों पर शिवभक्तों का सैलाब और जगह-जगह सेवा के लिए लगाए गए दर्जनों शिविर… लेकिन इन सबके बीच नगर पंचायत इमलीखेड़ा की सफाई व्यवस्था को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। शिवभक्तों की सेवा के बड़े-बड़े दावों के बीच यदि स्वच्छता व्यवस्था ही पटरी से उतर जाए तो आखिर इसे कैसी सेवा कहा जाए?
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स्थानीय लोगों का कहना है कि
कांवड़ यात्रा को देखते हुए नगर पंचायत प्रशासन को पहले से ही विशेष सफाई व्यवस्था करनी चाहिए थी। शिविरों के आसपास नियमित सफाई, कूड़ा उठाने और गंदगी को तत्काल हटाने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी था। मगर कई स्थानों पर व्यवस्थाएं अपेक्षा के अनुरूप नजर नहीं आने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

शिविर लगाने वालों ने निभाई जिम्मेदारी, नगर पंचायत कब जागेगी?
एक तरफ सामाजिक संगठन और स्थानीय लोग अपनी क्षमता के अनुसार शिवभक्तों के लिए भोजन, पानी, शरबत और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ नगर पंचायत की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि शिवभक्तों की सेवा केवल भंडारे और शिविर लगाने से पूरी नहीं होती, बल्कि उनके लिए साफ रास्ते, स्वच्छ वातावरण, पेयजल, शौचालय और बेहतर सफाई व्यवस्था भी जरूरी है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कांवड़ यात्रा हर साल होती है और प्रशासन को इसकी तैयारियों की जानकारी पहले से होती है, तो फिर सफाई व्यवस्था को लेकर अंतिम समय में अव्यवस्था क्यों दिखाई देती है?
अधिकारी मैदान में उतरें, सिर्फ कागजों में न चले व्यवस्था

स्थानीय नागरिकों ने नगर पंचायत प्रशासन से मांग की है कि अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर शिविर क्षेत्रों और मुख्य मार्गों का निरीक्षण करें तथा सफाई कर्मचारियों को नियमित सफाई और कूड़ा उठाने के निर्देश दें। लोगों का कहना है कि शिवभक्तों की आस्था से जुड़े इस बड़े आयोजन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
अब सवाल नगर पंचायत से है—जब शिवभक्त सड़कों पर हैं, तो सफाई व्यवस्था के जिम्मेदार कर्मचारी आखिर कहां हैं? क्या व्यवस्था सिर्फ कागजों और दावों तक सीमित है, या फिर धरातल पर भी इसका असर दिखाई देगा?




