मदरहुड विश्वविद्यालय, रूड़की में “बौद्धिक संपदा अधिकार” पर जागरूकता सेमिनार का सफल आयोजन किया गया। अनुसंधान एवं विकास केंद्र मदरहुड विश्वविद्यालय रुड़की के द्वारा आज “बौद्धिक संपदा अधिकार एवं नवाचार की रक्षा करना और रचनात्मकता को बढ़ावा देना” विषय पर एक ऑनलाइन जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० (डा०) नरेंद्र शर्मा की पूर्व अनुमति एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कुलपति महोदय ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ABSS 2026: “एनईपी: शिक्षा से विकसित भारत” के अंतर्गत इस प्रकार के कार्यक्रम छात्रों में अनुसंधान, नवाचार एवं स्टार्ट-अप की संस्कृति को बढ़ावा देंगे।

इस जागरूकता सत्र का मुख्य उद्देश्य छात्रों, स्नातक सदस्यों और शोधार्थियों को आईपीआर के व्यावहारिक ज्ञान से सशक्त बनाना था। साथ ही यह बताया गया कि अपने नवाचार, शोध, प्रकाशन और आविष्कारों की कानूनी सुरक्षा कैसे की जा सकती है।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता सुश्री स्वाति सिवाच, संस्थापक, टेकविज़नओव रहीं। वह एक अनुभवी आईपीआर पेशेवर हैं। उन्होंने पेटेंट फाइलिंग, ट्रेडमार्क नामांकन, कॉपीराइट संरक्षण और आईपीआर रणनीति परामर्श पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने पोर्टेबिलिटी प्लांट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में आईपीआर के कॉम्प्लेक्स मुद्दों को वास्तविक उदाहरणों के साथ समझाया।

और साथ ही शिक्षा और उद्योग में बौद्धिक संपदा भंडार का महत्व और मूल सिद्धांत, पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क का अवलोकन, शोध, प्रकाशन, नवाचार और स्टार्ट-अप से जुड़े वास्तविक केस स्टडी, विचारों और रचनाओं की सुरक्षा में सामान्य गलतियां और सर्वोत्तम तरीके, प्रतिभागियों के लिए विशेष प्रश्नोत्तरी सत्र का भी आयोजन किया गया,इस कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यक्रम समन्वयक प्रो० (डॉ०) सीमा तोमर, कार्यक्रम सचिव डॉ० प्रियंका दनाई और डॉ० सुप्रिया दुबे तथा समिति सदस्यो की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के अंत में अनुसंधान एवं विकास केंद्र के मीडिया सदस्य डॉ० विवेक कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी इस तरह के सेमिनार आयोजित करता रहेगा, ताकि अनुसंधान और नवाचार में लगे सभी विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को नवीनताओं के साथ-साथ कानूनी सुरक्षा के बारे में भी जानकारी मिल सके।




