हरिद्वार। एक तरफ सरकार ऊर्जा संरक्षण और बिजली बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर जागरूकता अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ हरिद्वार जिले के कुछ सरकारी कार्यालयों में अधिकारी और कर्मचारी मौजूद न होने के बावजूद लाइटें, पंखे, एसी और अन्य विद्युत उपकरण घंटों तक चलते रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे सरकारी बिजली की खुलेआम बर्बादी हो रही है।

जनता का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में बिजली बचाने की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। जिस कार्यालय में कार्य समाप्त होने या कार्यालय खाली होने के बाद भी बिजली के उपकरण चलते पाए जाएं, वहां जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों से जवाब-तलब किया जाए और उनके विरुद्ध नियमों के अनुसार सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए।

लोगों का मानना है कि सरकार को सभी सरकारी कार्यालयों में “बिजली बचाओ, सरकारी धन बचाओ” अभियान चलाना चाहिए। साथ ही, कार्यालय बंद करते समय सभी विद्युत उपकरण बंद करना अनिवार्य बनाया जाए और समय-समय पर औचक निरीक्षण भी किए जाएं।

जनता का सवाल है—जब आम नागरिक से बिजली बचाने की अपेक्षा की जाती है, तो सरकारी कार्यालयों में इस तरह की लापरवाही क्यों? आखिर जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी का जिम्मेदार कौन होगा?
जिसको लेकर एक जिम्मेदार व्यक्ति ने माननीय मुख्यमंत्री जी को शिकायत भी की है इसकी जल्द से जल्द ऐसे अधिकारियों कर्मचारियों पर उचित कार्यवाही की जा सके




