उत्तराखंडहरिद्वार

स्वास्थ्य संरक्षण के स्वावलम्बन में पतंजलि विश्वविद्यालय की अग्रणी भूमिका – आचार्य बालकृष्ण

सात दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ‘स्वावलम्बन स्वास्थ्य संरक्षण’ का उद्घाटन

रिपोर्ट अभिषेक गोडवाल 

 

पतंजलि विश्वविद्यालय के दर्शन एवं संस्कृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘स्वावलम्बन स्वास्थ्य संरक्षण’ विषय पर सात दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया

 

इस कार्यशाला का उद्घाटन कुलपति आयुर्वेद शिरोमणि श्रद्धेय आचार्य श्री बालकृष्ण जी ने किया। इस कार्यशाला की मुख्य संरक्षिका प्रो. साध्वी देवप्रिया और मुख्य अतिथि राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तिरूपति के प्रो.नारायण पी. तथा विशिष्ट अतिथि हिन्दू महाविद्यालय, दिल्ली की डॉ. अनीता राजपाल और गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की डॉ बबीता शर्मा ने अपने विचार व्यक्त किये। 

इस अवसर पर कार्यशाला के संयोजक डॉ. गौतम आर. ने बताया कि इस कार्यशाला केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, देवप्रयाग से 20 तथा पतंजलि विश्वविद्यालय के 60 विद्यार्थी प्रतिभाग कर रहे है। कार्यशाला में विद्यार्थियों को स्वयं को स्वस्थ रखने के लिए योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा एवं एक्युप्रेशर आदि तकनीकों का प्रयोग करना सिखाया जायेगा। 

डॉ. गौतम आर. ने बताया कि दर्शन एवं संस्कृत विभाग को तीन प्रोजेक्ट प्राप्त हुए जिसमें प्रो- साध्वी देवप्रिया के मार्गदर्शन में संस्कृत, आयुर्वेद, योग और तंत्र विज्ञान के पाठ्यक्रम समायोगी, डॉ. गौतम के निर्देशन में सांयकालीन संस्कृत पाठ्यक्रम तथा डॉ. स्वामी परमार्थदेव के निर्देशन में कोरोना उत्तर तथा वैश्विक समस्याओं के समाधान में उपनिषदों की भूमिका शामिल है।

इस कार्यशाला में प्रति-कुलपति प्रो. मंयक अग्रवाल, ओडीएल के निदेशक प्रो. सत्येन्द्र मित्तल, कुलसचिव डॉ. प्रवीण पूनिया, डॉ. मनोहर लाल आर्य, डॉ. स्वामी परमार्थदेव, स्वामी आर्षदेव, प्रो. के.एन.एस. यादव, प्रो. ए.के.सिंह, प्रो. ओमनारायण तिवारी, डॉ. गणेश पाड्ंया, डॉ. प्रज्ञानदेव, डॉ.सांवर सिंह, डॉ. वैशाली, डॉ. अलका, डॉ. भागीरथी आदि उपस्थित रहे।

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