हरिद्वार विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन
हरिद्वार विश्वविद्यालय, रुड़की में “इंडस्ट्री–एकेडमिया सिनर्जी एवं रेगुलेटरी अफेयर्स (IASRA-2026)” विषय पर प्रथम राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हाइब्रिड मोड में सफलतापूर्वक किया गया। इस संगोष्ठी का उद्देश्य फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों एवं नियामक निकायों के मध्य प्रभावी समन्वय स्थापित करना रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) मोहनदत्त आहूजा (वाइस प्रेसिडेंट, सिडकुल ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन, हरिद्वार) ने अपने विस्तृत उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में फार्मा उद्योग तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है,
ऐसे में शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत तालमेल अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान एवं उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करने पर बल दिया तथा कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियाँ नवाचार और रोजगार के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करती हैं। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में
राहुल खैतान (निदेशक, एप्पल फॉर्मुलेशन प्रा. लि., रुड़की) एवं मदन धीमान (निदेशक, सीगल बायोटेक प्रा. लि., चंडीगढ़) उपस्थित रहे। उन्होंने उद्योग के वर्तमान परिदृश्य, चुनौतियों एवं संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में अतिथि-विशेष (Guest of Honour) के रूप में प्रो. (डॉ.) अनुज नौटियाल (अध्यक्ष, IPA उत्तराखंड शाखा) एवं प्रो. (डॉ.) राजीव शर्मा (अध्यक्ष, APTI उत्तराखंड शाखा) ने सहभागिता की। संगोष्ठी के संसाधन व्यक्तियों
(Resource Persons) के रूप में प्रो. (डॉ.) विपिन कुमार (डीन, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार), प्रो. (डॉ.) एस. मुखोपाध्याय (डीन, COP, शिवालिक) तथा प्रो. (डॉ.) लुभान सिंह (डीन, अनुसंधान, शुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ) ने अपने विशेषज्ञ व्याख्यान प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के संरक्षक (Patron) सीए एस. के. गुप्ता (अध्यक्ष, हरिद्वार विश्वविद्यालय) रहे, जबकि सह-संरक्षक (Co-Patron) नमन बंसल (उपाध्यक्ष, हरिद्वार विश्वविद्यालय) रहे।
इस अवसर पर अपने प्रेरणादायक संबोधन में सीए एस. के. गुप्ता ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की सफलता उसके उद्योगों के साथ मजबूत संबंधों पर निर्भर करती है। उन्होंने बताया कि हरिद्वार विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ उद्योगोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) रमा भार्गव (प्रो-वाइस चांसलर) द्वारा की गई। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि शिक्षा और उद्योग के बीच समन्वय समय की आवश्यकता है। उन्होंने इस संगोष्ठी को ज्ञान के आदान-प्रदान का सशक्त मंच बताते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों को नवीनतम शोध, तकनीकी प्रगति एवं नियामक प्रक्रियाओं की गहन समझ प्राप्त होगी। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा भविष्य में भी ऐसे अकादमिक आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित करने की बात कही। सह-अध्यक्ष (Co-Chairperson) के रूप में प्रो. (डॉ.) आदेश के. आर्य (प्रो-वाइस चांसलर) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के संयोजक (Convener) प्रो. (डॉ.) देवव्रत कुमार (विभागाध्यक्ष, फार्मेसी) रहे, जबकि सह-संयोजक (Co-Convener) श्रीमती सुमिता मनहास (एसोसिएट प्रोफेसर) रहीं। इस संगोष्ठी में शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान नीति क्रियान्वयन, बौद्धिक संपदा प्रबंधन, नियामक अनुपालन तथा कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गई। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ। इस शुभ अवसर पर प्रो0 संदीप दरवारी, प्रो0 विशाल बालियान, फरहान उस्मानी, इमरान, साक्षी महरोत्रा, मानसी, चेतना आदि उपस्थित रहें।



