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हरिद्वार विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय कार्यशालारू हार्टफुलनेस अप्रोच के द्वारा कल्याण और एकाग्रता वृद्धि के लिए कार्यान्वयनः

हरिद्वार विश्वविद्यालय भविष्य में भी हार्टफुलनेस इंस्टिट्यूट के साथ मिलकर कल्याण कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहा

आज दिनांक 29 सितंबर 2024 को तीन दिवसीय कार्यशाला “कल्याण और एकाग्रता वृद्धि के लिए हार्टफुलनेस अप्रोच का कार्यान्वयन” का सफल आयोजन हार्टफुलनेस मेडिटेशन सेंटर, रुड़की, हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट, हैदराबाद के सहयोग से हरिद्वार विश्वविद्यालय, रुड़की में किया गया। यह कार्यशाला 26 से 28सितंबर 2024 तक आयोजित की गई, जिसमें छात्रों, संकाय सदस्यों और क्षेत्र भर के स्वास्थ्य उत्साही लोगों ने भाग लिया।

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को हार्टफुलनेस मेडिटेशन तकनीकों से परिचित कराना था, जो कल्याण, मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता को बढ़ाने के लिए डिजाइन की गई हैं। हार्टफुलनेस ध्यान केन्द्र रूड़की के विशेषज्ञ श्री बी0 पी0 कुकरेत्ती और रश्मि कुकरेत्ती प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को आंतरिक संतुलन प्राप्त करने और व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में ध्यान केंद्रित करने के व्यावहारिक तरीकों से अवगत कराया गया।

इस कार्यशाला को प्रतिभागियों से अपार सराहना मिली, जिन्होंने प्राप्त अंतर्दृष्टियों और व्यावहारिक उपकरणों के लिए अपनी कृतज्ञता व्यक्त की, कुछ प्रतिभागियों ने तीन दिनों के अभ्यास के बाद ही अपनी एकाग्रता और तनाव प्रबंधन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखा।

हरिद्वार विश्वविद्यालय के चेयरमैन सी0 ए0 एस के गुप्ता, उपाध्यक्ष श्री नमन बंसल ने हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट और मेडिटेशन सेंटर के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, “इस प्रकार की कार्यशालाएँ हमारे छात्रों और संकाय के समग्र कल्याण को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्रो वाइस चांसलर प्रोफेसर बी0 एम0 सिंह, ने बताया की हार्टफुलनेस अप्रोच तनाव प्रबंधन और एकाग्रता सुधारने के व्यावहारिक उपकरण प्रदान करती है, जो शैक्षणिक और व्यावसायिक सफलता के लिए अत्यधिक आवश्यक हैं।”

प्रोफेसर एवं डीन डॉ आदेश आर्य, ने बताया की कार्यशाला की सफलता को देखते हुए हरिद्वार विश्वविद्यालय भविष्य में भी हार्टफुलनेस इंस्टिट्यूट के साथ मिलकर कल्याण कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहा है, इस कार्यशाला मे विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार सुमित चौहान, प्रोफेसर डॉ0 यशवीर सिंह, डॉ विपिन सैनी, डॉ मृदुला सिंह और अन्य प्रोफेसर मौजूद थे।

 

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