रिपोर्ट अभिषेक सैनी
श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ के जयघोष के बीच अखिल भारतीय हिंदू क्रांति दल युवा मोर्चा (उत्तराखंड) एक बार फिर शिवभक्तों की सेवा के लिए अपना विशाल सेवा अभियान शुरू करने जा रहा है। संगठन द्वारा माजरी चौराहा, इमलीखेड़ा पर 9वें विशाल कांवड़ सेवा शिविर का आयोजन 5 अगस्त से 9 अगस्त 2026 तक किया जाएगा। इस दौरान हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटने वाले हजारों कांवड़ यात्रियों को पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ निःशुल्क सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

आयोजन समिति ने बताया कि सेवा शिविर में श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध एवं पौष्टिक भोजन, चाय, दूध, ब्रेड, बिस्कुट, फल, ठंडा पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, विश्राम स्थल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यापक व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सेवा शिविर में स्वयंसेवकों की टीम 24 घंटे तैनात रहेगी, जो हर जरूरतमंद कांवड़िए की सहायता के लिए तत्पर रहेगी।

प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन सैनी ने कहा कि कांवड़ियों की सेवा करना भगवान शिव की आराधना के समान है। संगठन पिछले आठ वर्षों से लगातार सेवा शिविर लगाकर मानव सेवा का कार्य कर रहा है और इस वर्ष नौवें शिविर को और अधिक भव्य एवं सुव्यवस्थित रूप देने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि हिंदू क्रांति दल केवल सामाजिक और धार्मिक कार्यों की बात नहीं करता, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारकर समाज के सामने उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।

शिविर की तैयारियों में निर्दलीय नगर पंचायत अध्यक्ष इमली खेड़ा मनोज सैनी (अध्यक्ष), शानू गोयल (व्यापार मंडल अध्यक्ष), सोमपाल प्रजापति (जिला मीडिया प्रभारी), ललित सैनी, डॉ. विजयपाल प्रजापति, नितिन सैनी, संजीव कर्णवाल सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता दिन-रात जुटे हुए हैं। आयोजन को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के समाजसेवी, व्यापारी और युवा भी बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं।

आयोजन समिति ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में शिविर में पहुंचकर सेवा कार्य में सहयोग दें और पुण्य के इस महाअभियान का हिस्सा बनें। समिति का कहना है कि “सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और शिवभक्तों की सेवा करना सौभाग्य की बात है।”
हर वर्ष की तरह इस बार भी इमलीखेड़ा का माजरी चौराहा श्रद्धा, सेवा और मानवता का संगम बनेगा, जहां हजारों शिवभक्तों का स्वागत पूरे सम्मान और आत्मीयता के साथ किया जाएगा।
हिंदू क्रांति दल का एक ही संकल्प — शिवभक्तों की सेवा, मानवता की रक्षा और सनातन संस्कृति का सम्मान।”




