रुड़की में भाजपा द्वारा आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम उस समय विवादों में आ गया, जब कई डिजिटल मीडिया पत्रकारों ने आरोप लगाया कि उन्हें कार्यक्रम स्थल में प्रवेश नहीं दिया गया। घटना के बाद पत्रकारों में गहरी नाराज़गी देखने को मिली और इसे मीडिया के साथ भेदभाव का मामला बताया जा रहा है।
डिजिटल पत्रकारों का कहना है कि आज के दौर में डिजिटल मीडिया जनता तक सूचना पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है। चुनावी अभियानों के दौरान राजनीतिक दल इन्हीं डिजिटल प्लेटफॉर्मों का व्यापक उपयोग करते हैं, लेकिन जब संवाद, सवाल-जवाब और जवाबदेही की बात आती है, तो डिजिटल पत्रकारों को कार्यक्रम से बाहर रखा जाता है।
इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं से खुला संवाद था, तो फिर मीडिया के एक वर्ग को प्रवेश से क्यों वंचित रखा गया? क्या सवालों से बचने की कोशिश की गई, या फिर प्रवेश को लेकर कोई अलग व्यवस्था थी? इन सवालों के जवाब अभी सामने नहीं आए हैं।
पत्रकारों ने कहा कि मीडिया चाहे प्रिंट हो, इलेक्ट्रॉनिक हो या डिजिटल—सभी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का हिस्सा हैं। किसी भी वर्ग के पत्रकारों के साथ अलग व्यवहार न केवल पत्रकारिता की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि पारदर्शिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी बहस खड़ी करता है।
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर डिजिटल पत्रकारों में रोष है और वे सभी मीडिया संस्थानों के साथ समान व्यवहार की मांग कर रहे हैं। वहीं, भाजपा या कार्यक्रम आयोजकों की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि उनका पक्ष आता है, तो उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए, ताकि समाचार पूरी तरह संतुलित रहे।




