इमलीखेड़ा मार्ग पर दरियापुर के समीप शाम लगभग 5 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसे में स्कूटी और बाइक की आमने-सामने की टक्कर हो गई। इस दुर्घटना में नरेश कुमार व उनकी पत्नी केसर, निवासी हकीमपुर तुर्रा, गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इतना भीषण था कि राह चलते लोगों की भीड़ तो जमा हो गई, लेकिन अधिकांश लोग तमाशबीन बनकर केवल वीडियो बनाते नजर आए।

हालांकि इस संवेदनहीनता के बीच एक उम्मीद की किरण भी देखने को मिली — इमलीखेड़ा चौकी प्रभारी उमेश कुमार और हेड कांस्टेबल संजय रावत उस समय उसी मार्ग पर अपनी निजी कार से पेट्रोलिंग कर रहे थे। जैसे ही उनकी नजर दुर्घटना पर पड़ी, उन्होंने तत्काल मौके पर रुककर स्थिति का जायज़ा लिया।

तमाशबीनों को फटकार लगाते हुए चौकी प्रभारी उमेश कुमार ने न सिर्फ़ मानवता का परिचय दिया, बल्कि घायलों को अपनी निजी कार में बैठाकर आरोग्यम हॉस्पिटल रुड़की रोड करौंदी पहुंचाया और इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया। इस तत्परता और संवेदनशीलता ने समय रहते दोनों घायल व्यक्तियों को आवश्यक चिकित्सा सहायता दिलाई, जो उनके जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि अगर वर्दी में कुछ लोग सख्ती के लिए पहचाने जाते हैं, तो वहीं कुछ अधिकारी मानवता की मिसाल बनकर समाज में भरोसे की लौ भी जलाए रखते हैं। उमेश कुमार जैसे जांबाज़ पुलिसकर्मी देश के लिए प्रेरणा हैं — जो न केवल ड्यूटी निभाते हैं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक और संवेदनशील इंसान की भूमिका भी बखूबी निभाते हैं।




