आदर्शनगर निवासी आशीष शर्मा ने बताया कि उनके परिजनों द्वारा योगेश गोयल नामक व्याक्ति को घर का एक हिस्सा किराए पर दिया हुआ था, लेकिन किराये दार की नियत में खोट के चलते उसने हमारी निजी संपत्ति का बैनामा करा लिया, जिसमें वह न्यायालय से केस जीत गए और दो माह के अंदर किरायदार को घर खाली करना होगा।
प्रेस क्लब पर पत्रकारों से वार्ता करते हुए पीड़ित आशीष शर्मा ने बताया कि वर्ष 2017 में उन्होंने अपने घर का एक हिस्सा योगेश गोयल को किराए पर दिया था। नवम्बर तक तो योगेश गोयल द्वारा किराया ठीक ठाक दिया गया, उसके बाद जब फरवरी 2018 में वह किराया मांगने लगे, तो योगेश गोयल ने किराया देने से साफ मना कर दिया और कहा कि वह उसकी निजी संपत्ति है, अब वह किराया नहीं देंगे और उसका बैनामा भी उसके पास है। यह सुनकर उनके होश उड़ गए और उन्होंने कोतवाली सिविल लाइन रुड़की को धोखाधड़ी की तहरीर दी। साथ ही मामले में न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया। लंबे समय तक न्यायालय में कैस विचाराधीन होने के बाद पिछले दिनों न्यायालय द्वारा फैसला सुनाते हुए किराएदार को दो माह के अंदर घर खाली करने का आदेश दिया गया और मिथिलेश शर्मा के हक में फैसला सुनाया। पीड़ित ने यह भी बताया कि इस प्रकरण के चलते मानसिक प्रताड़ना से उनके पिता की भी मृत्यु हो गई। यह उनके लिए बहुत बड़ी क्षति है। उन्होंने यह भी कहा कि वह न्यायालय से मांग करेंगे कि जो उन्हें मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ा और उनका समय और धन की बर्बादी हुई, उसकी भी रिकवरी हो। उन्होंने यह भी कहा कि किराएदार को 1200 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से 2025 तक का भुगतान करना होगा। वहीं पीड़िता मिथलेश शर्मा ने बताया कि यदि वह न्यायालय में न जाते हैं, तो वह अपनी निजी संपत्ति को खो देते। ऐसे जालसाजी करने वाले लोग सीधे-साधे लोगों से संपत्ति हड़पने में माहिर होते हैं। उन्होंने न्यायालय का आभार जताया और कहा कि उन्हें अंदेशा है कि विपक्षी किराएदार योगेश गोयल फिर किसी षड्यंत्र के जाल बुन रहा है। वह जल्द ही कोतवाली रुड़की को न्यायालय का आदेश दिखाकर आरोपियों की गिरफ्तारी की भी मांग करेंगे, ताकि ऐसे लोग अन्य किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति पर अपना हक न जता पाए। उन्होंने यह भी कहा कि बिना किसी ठोस कारवाई के उनकी जमीन का दाखिल खारिज करने वाले लेखपाल व कानूनगो के खिलाफ भी शिकायत करेंगे, ताकि पीड़ित या गरीब व्यक्ति ऐसे मामलों से फिर पीड़ित ना हो, उन्हें अपनी संपत्ति को सुरक्षित करने में सालों बर्बाद करने पड़े, जिसमें धन और समय की भी बर्बादी हुई। प्रेस वार्ता में कर्नल महिपाल शर्मा, प्रमोद शर्मा, अनिल पूरी, मिथलेश शर्मा, आशीष शर्मा आदि मौजूद रहे।




