नगर पंचायत इमलीखेड़ा में अवैध शराब का कारोबार अब खतरनाक स्तर पर पहुँच चुका है। गली-मोहल्लों में रात-दिन चल रही सप्लाई, डोर-टू-डोर डिलीवरी और कई स्थानों पर सक्रिय छुपे हुए स्टॉक पॉइंट ने पूरे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि
जब अवैध कारोबार इस कदर फैल चुका है… तो वरिष्ठ अधिकारी खुद मौके पर आकर संज्ञान क्यों नहीं ले रहे?
“अब कागज़ों पर नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए”—स्थानीय निवासियों की सख्त मांग
लोगों का कहना है:
लिखित शिकायतें दी गईं
विभाग को कई बार अवगत कराया गया
छापेमारी की मांग लंबे समय से उठ रही
कई बार सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर मुद्दा जोर से उठाया गया
इसके बावजूद स्थिति जस की तस होने से जनता में नाराज़गी तेजी से बढ़ रही है।
जनता का सीधा संदेश—वरिष्ठ अधिकारी खुद इमलीखेड़ा आएं
स्थानीय लोगों ने स्पष्ट कहा है:
“अब सिर्फ आदेशों और रिपोर्ट्स से बात नहीं बनेगी।
हम चाहते हैं कि जिला स्तर व विभाग स्तर के बड़े अधिकारी खुद इमलीखेड़ा में आकर स्थिति का जायज़ा लें।”
जनता का यह भी कहना है कि:
जमीनी हकीकत कागज़ों से बिल्कुल अलग है
छोटे स्तर की कार्रवाई अब पूरी तरह नाकाफी साबित हो चुकी है
बड़े अफसरों के现场 निरीक्षण के बिना इस नेटवर्क को तोड़ना संभव नहीं
अवैध शराब का बढ़ता खतरा—किस बात का इंतज़ार है?
जब अवैध शराब का धंधा:
खुलेआम चलने लगे,
रात में आवाजाही बढ़ जाए,
युवाओं पर इसका असर दिखने लगे,
और परिवार चिंतित हों,
तो प्रशासन के उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों पर स्वाभाविक रूप से जवाबदेही बढ़ जाती है।
और यही वजह है कि अब पूरे क्षेत्र की जनता एक ही बात कह रही है—
“अधिकारी खुद संज्ञान लेने इमलीखेड़ा आएं… और मौके पर देखकर सच्चाई समझें।”
जनता की अंतिम अपील
इमलीखेड़ा के नागरिकों ने आवाज उठाई है:
“मामला अब छोटा नहीं रहा—वरिष्ठ अधिकारी तुरंत इमलीखेड़ा में निरीक्षण करें, कार्रवाई शुरू करें और नेटवर्क को खत्म करें।”
यदि ऐसा नहीं हुआ, तो लोगों का कहना है कि वे इस मुद्दे को और बड़े मंच पर उठाने को मजबूर होंगे।




