भारतीय किसान यूनियन क्रांति (अ-राजनीतिक) संगठन को बड़ा झटका
राष्ट्रीय संयोजक मुकेश कंबोज ने थामा भारतीय किसान यूनियन रोड गुट का हाथ**
भारतीय किसान यूनियन क्रांति (अ-राजनीतिक) धड़े को उस समय बड़ा झटका लगा जब संगठन के राष्ट्रीय संयोजक मुकेश कंबोज ने पद छोड़कर भारतीय किसान यूनियन रोड गुट का हाथ थाम लिया।
उनके इस कदम ने संगठन के भीतर हलचल और किसानों के बीच नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
अचानक लिए फैसले से संगठन में हड़कंप
मुकेश कंबोज लंबे समय से यूनियन क्रांति के प्रमुख चेहरे के रूप में काम कर रहे थे।
किसानों के जमीनी मुद्दों को उठाने में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण वे संगठन की रीढ़ माने जाते थे।
लेकिन अचानक हुए इस बदलाव ने अ-राजनीतिक धड़े को असमंजस में डाल दिया है।
कंबोज का बयान—“किसान हित जहाँ मजबूत हो, वहीं मेरा साथ”
संगठन परिवर्तन के बाद मुकेश कंबोज ने कहा—
> “मेरा लक्ष्य हमेशा किसान हित रहा है।
मैंने वही रास्ता चुना है जहाँ किसान की आवाज़ को ज्यादा ताकत, संगठन को ज्यादा दिशा और संघर्ष को ज्यादा धार मिले।”
उनके इस बयान को किसान आंदोलन में एक नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
यूनियन क्रांति में अंदरूनी हलचल, कई जिलों में बैठकें
कंबोज के हटने से क्रांति संगठन में नेतृत्व संकट खड़ा हो गया है।
सूत्रों के अनुसार—
कई जिलों में आपात बैठकें बुलाई गईं,
नए संयोजक को लेकर चर्चा तेज है,
और कई पदाधिकारी असमंजस में हैं।
संगठन के भीतर इसे “बड़ा नुकसान” बताया जा रहा है।
रोड गुट के लिए बड़ी मजबूती
दूसरी ओर, भारतीय किसान यूनियन रोड गुट ने मुकेश कंबोज के शामिल होने को ऐतिहासिक बताया है।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा—
> “किसान आंदोलन को एक मजबूत, ईमानदार और जमीनी नेता मिला है।
इससे रोड गुट की पकड़ राष्ट्रीय स्तर पर और ज्यादा मजबूत होगी।”
किसान मुद्दों पर आगामी राष्ट्रीय अभियानों में मुकेश कंबोज की महत्वपूर्ण भूमिका रहने की संभावना है।
किसानों की नजर अब अगले कदम पर
कंबोज के इस कदम ने किसान संगठनों के समीकरण बदल दिए हैं।
ग्रामीण इलाकों में चर्चा है कि
> “अब किसान आंदोलन की दिशा में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा।”
किसान अब दोनों संगठनों के आगे की रणनीति और आने वाले निर्णयों पर नज़र बनाए हुए हैं।
मुकेश कंबोज बने रोड अच्छा में राष्ट्रीय। संयोजक




