अल्मोड़ाउत्तराखंडकोटद्वारदेहरादूननैनीतालरूडकीहरिद्वार

भारत में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरों की मांग में वृद्धि

 

 हरिद्वार विश्वविद्यालय, रुड़की के प्रो वाइस चांसलर डॉ. आदेश के. आर्य ने आज हमारे संवाददाता से वार्ता में बताया कि भारत में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की बढ़ती मांग के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं, जिनमें नवीनतम सर्वेक्षण के आंकड़े भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस सर्वेक्षण में देखा गया है कि भारत में ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार और नई तकनीकों के आगमन से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों के लिए भविष्य में अवसर बहुत तेजी से बढ़ रहें हैं।                                                             

नवीनतम सर्वेक्षण के अनुसार हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक, भारत के 75 प्रतिशत बड़े उद्योग अब स्मार्ट ग्रिड और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों को अपनाने की योजना बना रहे हैं, जिसके लिए कुशल ओर योग्य इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की जरूरत होगी। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि नवीकरणीय ऊर्जा और स्मार्ट ग्रिड परियोजनाओं में काम करने वाले इंजीनियरों की संख्या अगले पांच वर्षों में 50 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है।

सर्वेक्षण के प्रमुख बिंदुः-

ऽ नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती मांग भारत सरकार की 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता स्थापित करने की योजना के चलते नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से वृद्धि हो रही है। इससे संबंधित परियोजनाओं में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की भूमिका अहम हो गई है।

ऽ स्मार्ट ग्रिड तकनीक का उपयोग बढ़ने से ऊर्जा का कुशल वितरण और प्रबंधन शामिल है, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों को नए समाधान डिजाइन और कार्यान्वयन में शामिल होना पड़ रहा है।

ऽ इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन और उपयोग में वृद्धि के कारण भी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की मांग में तेजी से वृद्धि हो रही है, खासकर बैटरी प्रबंधन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा दक्षता प्रणालियों के लिए।

भारत में 2025 के अंत तक रोजगार अवसरों की स्थितिः- भारत में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग क्षेत्र की नौकरी की संभावना 2025 तक 65 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है, जिसमें विशेष रूप से स्मार्ट ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा, और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्रों में रोजगार सृजन होगा। इसके अलावा, उद्योग 4.0 और ऑटोमेशन के बढ़ते प्रभाव से भी नए इंजीनियरिंग रोल्स का निर्माण हो रहा है।

सरकार की पहलः- भारत सरकार की कई योजनाएं, जैसे मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, और प्रधानमंत्री कुसुम योजना, न केवल तकनीकी विकास को बढ़ावा दे रही हैं, बल्कि इंजीनियरों के लिए नए रोजगार के अवसर भी पैदा कर रही हैं। सरकार की ओर से स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों के लिए नए रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं।

डॉ. आदेश के. आर्य ने कहा कि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की दुनिया में हो रहे इन परिवर्तनों के साथ-साथ, हम देख रहे हैं कि भारत में ऊर्जा, तकनीकी और स्मार्ट समाधानों के क्षेत्र में बदलाव आ रहे है। इस बदलाव को समझते हुए, भारतीय इंजीनियरों के लिए नई संभावनाएं खुल रही हैं। खासकर, वे जो नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड, और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे क्षेत्रों में काम करना चाहते हैं, उनके लिए शानदार अवसर उपलब्ध हैं।

नवीनतम आंकड़े और आंकलन

ऽ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में करियर के अवसरः- आईटी और कंप्यूटर विज्ञान के साथ-साथ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभरा है। सर्वेक्षण के अनुसार, 57.69 प्रतिशत रोजगार की संभावना के साथ, यह क्षेत्र अब भी तकनीकी परिवर्तन के साथ तेजी से बढ़ रहा है।

ऽ आईटी और सीएसई इंजीनियरों के मुकाबले, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बढ़ती नौकरी की मांग इस बात का संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र और अधिक विकास करेगा, खासकर जब भारत स्मार्ट सिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, और उभरती तकनीकों को बढ़ावा दे रहा है।

ऽ प्रोफेसर आर्य ने हमारे संवाददाता से खास बातचीत करते हुए बताया कि हरिद्वार विश्वविद्यालय ने इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (छम्च्-2020) के अनुसार तैयार किया है। इसके तहत अब कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग के प्रमुख विषयों को भी इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

हरिद्वार विश्वविद्यालय में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम को NEP-2020 के अनुरूप अपडेट किया है। इसमें कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग के प्रमुख विषयों को शामिल किया गया है। इससे ठ.ज्मबी करने वाले छात्रों-छात्राओं को दोहरे लाभ मिलेंगे। वे न केवल पारंपरिक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता प्राप्त करेंगे, बल्कि कंप्यूटर साइंस और आईटी के क्षेत्रों में भी मजबूत आधार तैयार करेंगे।

डॉ. आदेश के. आर्य ने यह भी बताया कि इस बदलाव से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के छात्रों को कई महत्वपूर्ण अवसर मिलेंगे। उन्हें भारत की 14 महारत्न कंपनियों, 26 नव रत्न कंपनियों, और 59 मिनी रत्न कंपनियों के साथ-साथ सभी राज्यों की इलेक्ट्रिकल सेक्टर कंपनियों, रेलवे, ओर लोक सेवा आयोग के द्वारा गजेटेड आफिसर बनने में, मोबाइल कंपनियों और लगभग 14,13,249 प्राइवेट कंपनियों में नौकरी मिलने के अवसर मिलेंगे।

इसके अलावा, डॉ. आर्य ने बताया कि इलेक्ट्रिकल इंजीनियर अब आईटी और कंप्यूटर कंपनियों में भी काम कर सकते हैं, क्योंकि अब उनके पास कंप्यूटर साइंस के कौशल भी होंगे। इससे उनकी रोजगार क्षमता में और वृद्धि होगी, और वे स्मार्ट टेक्नोलॉजीज, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन र्लनिंग (ML) और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों में भी करियर बना सकते हैं।

भारत की प्रमुख कंपनियों में अवसर भारत की महान कंपनियाँ जैसे NTPC, BSNL, Petroleum, Power Grid Corporation, BHEL और Coal India जैसे क्षेत्रों में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों के लिए रोजगार के कई अवसर हैं। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर, TCS, L&T, Wipro, Infosys, Accenture, और Cognizant आदि में भी नौकरी के अवसर प्राप्त कर सकतें है।

हरिद्वार विश्वविद्यालय ने इस कदम से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए नई राहों को खोला है, जो न केवल पारंपरिक इंजीनियरिंग में बल्कि आईटी, कंप्यूटर साइंस और स्मार्ट टेक्नोलॉजीज में भी अपनी भूमिका निभा सकते हैं। इससे भारत के प्रमुख उद्योगों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और विद्यार्थियों को ज्यादा अवसर मिलेंगे।

भारत में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की मांग अब एक वैश्विक दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जैसे-जैसे भारत नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड्स, इलेक्ट्रिक वाहनों, और स्मार्ट तकनीकों में अग्रणी बन रहा है, वैसे-वैसे इस क्षेत्र में विशेषज्ञता वाले पेशेवरों की मांग भी बढ़ रही है। नवीनतम सर्वेक्षण और सरकारी पहलें दर्शाती हैं कि यह क्षेत्र आने वाले समय में रोजगार के एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभरेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button