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पतंजलि विश्वविद्यालय में विश्व शांति एवं समृद्धि हेतु वासंती नवसस्येष्टि होलीकोत्सव यज्ञ का आयोजन, फूलों से खेली होली

होली आत्मशुद्धि, आत्मजागरण और अंतर्मन के विकारों के दहन का पर्व है : आचार्य बालकृष्ण

 

 

हरिद्वार, 03 मार्च। वैश्विक युद्ध संकट और अशांत परिस्थितियों के बीच पतंजलि विश्वविद्यालय के खेल प्रांगण में होली के पावन पर्व पर ‘विश्व शांति एवं समृद्धि हेतु वासंती नवसस्येष्टि होलीकोत्सव यज्ञ, भजन एवं पुष्प होली’ का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव तथा कुलपति आचार्य बालकृष्ण के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष हवन संपन्न हुआ। यज्ञ में युद्ध, हिंसा एवं वैश्विक संकट से पीड़ित निर्दोष, निर्बल और असहायजनों की सुरक्षा, सुख-शांति, अभय जीवन तथा समस्त मानवता के कल्याण के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई। 

पूरी दुनिया पर गहराते युद्ध संकट पर स्वामी रामदेव ने कहा कि वर्चस्व हेतु युद्ध नहीं योग चुनें। योग मूलक सिद्धांतों से ही सही दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि युद्ध के बीच योग, आरोग्य, शांति, मानव धर्म, नैतिक, राजनैतिक, लोकतांत्रिक, संवैधानिक मूल्य बोध व साथ ही लालच, घृणा, स्वार्थ, धोखा, क्रोध, प्रतिशोध की ज्वालाएं फूट रही हैं। चयन आपको करना है, लेकिन समाधान केवल योग है।

स्वामी रामदेव ने कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि भय, द्वेष और नकारात्मकता को त्यागकर प्रेम, करुणा, समरसता और मानवता को अपनाने का पावन अवसर है। उन्होंने आह्वान किया कि हम सभी समाज के प्रत्येक वर्ग—गरीब, वंचित, पीड़ित एवं जरूरतमंद—के प्रति संवेदनशील बनें और उन्हें सुरक्षित, सम्मानपूर्ण एवं आनंदमय जीवन प्रदान करने का संकल्प लें।

आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि होली आत्मशुद्धि, आत्मजागरण और अंतर्मन के विकारों के दहन का पर्व है। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने भजन-कीर्तन में सहभागिता की तथा पुष्पों एवं प्राकृतिक, हर्बल अबीर-गुलाल से होली खेलकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। किसी भी प्रकार के रासायनिक रंगों का प्रयोग नहीं किया गया, जिससे स्वास्थ्य और प्रकृति दोनों सुरक्षित रहें। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि होली खेलने से पहले अपने शरीर के खुले हिस्सों पर सरसों या नारियल का तेल अथवा कोल्ड क्रीम लगाएँ, इससे रसायनयुक्त हानिकारक रंगों से त्वचा खराब होने की संभावना कम हो जाती है। साथ ही उन्होंने अपनी आँखों को रंगों से बचाने की भी सलाह दी। 

पुष्पों की सुगंध, वैदिक मंत्रों की ध्वनि, भजनों की मधुर स्वर लहरियों और पुष्प वर्षा के मध्य यह उत्सव शांति प्रार्थना, सद्भाव और मानवता का प्रेरक संदेश देता हुआ संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में पतंजलि विश्वविद्यालय, पतंजलि गुरुकुलम्, आचार्यकुलम्, पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज आदि शैक्षणिक संस्थानों के प्राचार्यगण, शिक्षकगण, विद्यार्थीगण के साथ-साथ पतंजलि संस्थान से सम्बद्ध सभी ईकाइयों के सेवा प्रमुख, ईकाई प्रमुख, विभाग प्रमुख, कर्मचारीगण, संन्यासी भाई व साध्वी बहनें उपस्थित रहे।

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