आज बसंत पंचमी के पावन पर्व पर हरिद्वार विश्वविद्यालय के अर्न्तगत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मॉ सरस्वती की वन्दना के साथ दीपक प्रजलित कर शुभारम्भ किया। कार्यक्रम के अर्न्तगत विश्विद्यालय के बच्चों द्वारा सुन्दर प्रस्तुतियॉ दी गई जिससे बच्चों ने सभी का मन मोह लिया।
ॐ सरस्वती मया दृष्ट्वा, वीणा पुस्तक धारणी,
हंस वाहिनी समायुक्ता मां विद्या दान करोतु में,
हरिद्वार विश्वविद्यालय के अध्यक्ष सत्येन्द्र गुप्ता ने बच्चों को उत्साह वर्धन करते हुए बसंत पंचमी महत्व को समझाया ओर कहा कि मान्यता है वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती के जन्मदिन तथा रति व कामदेव के पृथ्वी पर आगमन के रूप में बसंत पंचमी मनाई जाती है। इसलिए दंपति रति और कामदेव का भी इस दिन पूजन करते हैं, जिससे वैवाहिक जीवन में किसी तरह का कष्ट न आए और बसंत पंचमी की पौराणिक कथा
सृष्टि की रचना के समय ब्रह्माजी ने महसूस किया कि जीवों की सर्जन के बाद भी चारों ओर मौन छाया रहता है। उन्होंने विष्णु जी से अनुमति लेकर अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे पृथ्वी पर एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई। छह भुजाओं वाली इस शक्ति रूप स्त्री के एक हाथ में पुस्तक, दूसरे में पुष्प, तीसरे और चौथे हाथ में कमंडल और बाकी के दो हाथों में वीणा और माला थी। ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, चारों ओर ज्ञान और उत्सव का वातावरण फैल गया, वेदमंत्र गूंज उठे। ऋषियों की अंतः चेतना उन स्वरों को सुनकर झूम उठी। ज्ञान की जो लहरियां व्याप्त हुईं, उन्हें ऋषि चेतना ने संचित कर लिया। तब से इसी दिन को बंसत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस पावन पर्व की मैं हरिद्वार विश्वविद्यालय की ओर से वसंत पंचमी की हार्दिक बधाई व शुभकामनाऐं देता हूॅ। ओर सभी बच्चों को ज्ञान अर्जित कर अपने आपको नई उचाईयों को छुए ऐसी मेरी सभी के उज्जवल भविष्य कामना करता हूॅ। इस शुभ अवसर पर रजिस्ट्रार सुमित चोहान, प्रो0 जितेन्द्र चौधरी, कार्यक्रम की कोर्डिनेटर प्रो0 वर्तिका, प्रो0 मानसी मोर्य, प्रो0 धीराज कुमार विश्वकर्मा, वन्दना, आरोही, आयुषी, कांकना बनिक आदि उपस्थित रहें।




