उत्तराखंड

हरिद्वार विश्वविद्यालय में आयोजित किया गया ’’बौद्धिक संपदा अधिकार’’ ;प्च्त्द्धष् पर विशेषज्ञ व्याख्यान

रिपोर्ट अभिषेक गोडवाल 

हरिद्वार, 21 नवम्बर, 2024 आज हरिद्वार विश्वविद्यालय में बौद्धिक संपदा अधिकार (प्च्त्) पर एक विशेष विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के अध्यक्ष श्री सी.ए. एस.के. गुप्ता और उपाध्यक्ष नमन बंसल के उद्घाटन भाषण से हुई। दोनों ने छात्रों और शोधकर्ताओं को बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जागरूक किया मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर अमन गणेश, जो महारिषी मार्कंडेश्वर (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) से जुड़े हैं, ने प्च्त् के विभिन्न पहलुओं जैसे पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और इंडस्ट्रियल डिज़ाइन पर गहराई से चर्चा की। उन्होंने बताया कि बौद्धिक संपदा अधिकार न केवल व्यक्तिगत या संस्थागत विकास के लिए, बल्कि राष्ट्र के समग्र विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं,

 

कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और शोधकर्ताओं को बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व और उनकी रक्षा के उपायों से अवगत कराना था। प्रोफेसर अमन गणेश ने प्च्त् के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की, जैसे कि पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और इंडस्ट्रियल डिज़ाइन। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे बौद्धिक संपदा का सही उपयोग न केवल व्यक्तिगत या संस्थागत लाभ के लिए, बल्कि राष्ट्रीय और वैश्विक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इस मौके पर हरिद्वार विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रोफेसर प्रोफेसर धर्मबीर सिंह ने भी उपस्थित छात्रों को संबोधित किया और कहा, बौद्धिक संपदा के संरक्षण से नवाचार और शोध को प्रोत्साहन मिलता है, जिससे हमारे देश की विकास दर में वृद्धि होती है। इस प्रकार के आयोजनों से छात्रों को एक नए दृष्टिकोण से सोचने का अवसर मिलता है।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की प्रो वाइस चांसलर प्रोफेसर रमा भार्गव और प्रो वाइस चांसलर प्रोफेसर आदेश के आर्य ने भी अपने विचार व्यक्त किए। प्रोफेसर रमा भार्गव ने कहा, बौद्धिक संपदा अधिकार नवाचार, अनुसंधान और विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन्हें संरक्षित करना न केवल हमारे शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन देता है, बल्कि हमारे देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ाता है। वहीं, प्रोफेसर आदेश के आर्य ने इस अवसर पर कहा, ष्प्च्त् शिक्षा और उद्योग के बीच एक पुल का काम करता है। यह हमें अपनी रचनात्मकता को सही दिशा में उपयोग करने के लिए प्रेरित करता है।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और फैकल्टी सदस्यगण ने भाग लिया। इस विशेष व्याख्यान ने प्च्त् के प्रति जागरूकता को बढ़ाया और विश्वविद्यालय के शैक्षिक वातावरण में एक सकारात्मक दिशा में योगदान किया।

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