उत्तराखंड

गदरपुर में सियासी भूचाल, विधायक अरविंद पांडे ने DGP से मिलकर की निष्पक्ष जांच की मांग

गदरपुर में सियासी भूचाल, विधायक अरविंद पांडे ने DGP से मिलकर की निष्पक्ष जांच की मांग

गदरपुर विधानसभा क्षेत्र में सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते कई दिनों से भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी अब खुलकर सामने आ चुकी है और इसका असर सड़कों से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक साफ दिखाई दे रहा है। इसी उथल-पुथल के बीच गदरपुर के विधायक अरविंद पांडे लगातार सुर्खियों के केंद्र में बने हुए हैं।

हाल के दिनों में विधायक अरविंद पांडे एवं उनके परिवार पर जमीन हड़पने, धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए, जिसके बाद थाना बाजपुर में उनके परिजनों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज किए गए। इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए विधायक अरविंद पांडे ने इन्हें राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताते हुए निष्पक्ष और गहन जांच की मांग तेज कर दी है।

इसी क्रम में विधायक अरविंद पांडे ने पुलिस महानिदेशक (DGP) से मुलाकात कर अपने परिजनों के विरुद्ध दर्ज मुकदमों को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनके बहनोई जयप्रकाश तिवारी, भाई देवानंद पांडे, किशन पांडे तथा चचेरे भाई मोहन पांडे के खिलाफ थाना बाजपुर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) एवं 351(2) के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जो पूरी तरह निराधार, झूठे और तथ्यों से परे हैं।

विधायक अरविंद पांडे ने पुलिस महानिदेशक को सौंपे गए पत्र में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए शिकायतकर्ता और आरोपित पक्ष—दोनों का पॉलीग्राफ टेस्ट तथा हस्तलेख परीक्षण कराया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि यदि शिकायत झूठी पाई जाती है तो झूठी शिकायत दर्ज कराने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि निर्दोष लोगों को न्याय मिल सके।

अरविंद पांडे ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे किसी भी प्रकार की जांच से डरने वाले नहीं हैं। यदि जांच में उनका परिवार दोषी पाया जाता है तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन बिना ठोस प्रमाणों के राजनीतिक रंजिश के तहत झूठे मुकदमे दर्ज कराना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद गदरपुर की राजनीति और अधिक गर्मा गई है। अब सबकी निगाहें पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष पर टिकी हुई हैं, जिससे यह साफ हो सके कि मामला वास्तव में सच्चाई है या फिर किसी गहरी सियासी साजिश का हिस्सा।

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