उत्तराखंडदेहरादूनरूडकीहरिद्वार

  राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने आज देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार में ‘एआई फॉर डेमोक्रेसी’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय समिट में प्रतिभाग किया।

 

 

  राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने आज देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार में ‘एआई फॉर डेमोक्रेसी’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय समिट में प्रतिभाग किया।

 

  राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आज केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि हमारे वर्तमान को बदलने वाली शक्ति बन चुकी है। इसका उपयोग जनहित, सुशासन और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए होना चाहिए। एआई का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना जरूरी है।

 

   राज्यपाल ने कहा कि एआई शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, प्रशासन और सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने और नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में सेवाओं की जानकारी देने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ पारदर्शिता, सत्य और जिम्मेदारी भी जरूरी है। एआई में किसी तरह का पक्षपात समाज में असमानता को बढ़ा सकता है।

 

    उन्होंने कहा कि नागरिकों के अधिकारों से जुड़े मामलों में मानवीय जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है। एआई निर्णय लेने में सहायता कर सकती है, लेकिन मानव विवेक और जिम्मेदारी का स्थान नहीं ले सकती। न्याय व्यवस्था में भी इसका उपयोग सहायक के रूप में किया जाना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा हमें सिखाती है कि ज्ञान का उद्देश्य लोक कल्याण होना चाहिए।

 

    युवाओं का आह्वान करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उन्हें तकनीक सीखने और नवाचार करने के साथ यह भी सोचना चाहिए कि किसी तकनीक का उपयोग “क्या किया जा सकता है” के साथ-साथ “क्या किया जाना चाहिए” के आधार पर हो।

 

   राज्यपाल ने कहा कि एआई मानवता को बांटने वाली नहीं, बल्कि जोड़ने वाली शक्ति बने। ज्ञान के साथ विवेक, तकनीक के साथ नैतिकता और नवाचार के साथ जिम्मेदारी ही एआई के बेहतर उपयोग का आधार होना चाहिए। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी आयोजकों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों को बधाई दी।

   

  समिट की अध्यक्षता कर रहे देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा तकनीकी विकास को हमेशा मानव कल्याण से जोड़कर देखती रही है। एआई को मानव बुद्धि का विकल्प नहीं, बल्कि मानव क्षमता के विस्तार का माध्यम बनाना होगा।

 

  कार्यक्रम में लंदन स्थित सेंटर फॉर टुमौरों के संस्थापक अध्यक्ष मिस्टर डेक्स हंटर टोरिक ने कहा कि एआई का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए तकनीकी विकास के साथ लोग सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

 

  इस अवसर पर एआई फार डेमोक्रेसी पर आधारित विभिन्न प्रतियोगिता के विजेताओं को राज्यपाल ने सम्मानित किया।

 

   कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री श्री मदन कौशिक,आईपीयू जेनेवा की महासचिव सुश्री एण्डा फिलिप, द ब्रिटिश यूनिवर्सिटी इन इजिप्ट के डीन प्रोफेसर इब्राहिम सलामा, द सेंटर फॉर टुमॉरो के संस्थापक अध्यक्ष तथा एआई और पब्लिक पॉलिसी विशेषज्ञ डेक्स हंटर टोरिके, ब्रिटिश हाई कमीशन नई दिल्ली के प्रमुख-टेक पॉलिसी हैरी फिशर, स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ विजय धस्माना एवं मनु गौड सहित देश-विदेश के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

                                                         

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button