रुड़की। सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश की भूमि पर बनी दुकानों में कथित तौर पर बिना विभागीय अनुमति आकृति एवं क्षेत्रफल में परिवर्तन कर निर्माण कराए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कांवड़ यात्रा के दौरान अधिकारियों की व्यस्तता का फायदा उठाकर कुछ दुकानदारों द्वारा निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इस पूरे मामले में विभागीय कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार रुड़की में गंगनहर किनारे लक्ष्मी नारायण मंदिर के पास सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश की कई दुकानें स्थित हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ दुकानों में बिना विभागीय अनुमति निर्माण कार्य कराया जा रहा है तथा दुकानों की मूल आकृति और क्षेत्रफल में बदलाव किए जाने का प्रयास किया जा रहा है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य वास्तव में बिना अनुमति कराया जा रहा है तो विभागीय अधिकारियों की ओर से अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई, यह जांच का विषय है। सवाल यह भी उठ रहा है कि विभाग की भूमि और संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की है, उनकी निगरानी में कथित रूप से इस तरह के निर्माण कैसे हो रहे हैं।

वहीं, सिंचाई विभाग लंबे समय से अपनी भूमि और संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए प्रयासरत होने का दावा करता रहा है। ऐसे में विभागीय संपत्ति में कथित अनधिकृत निर्माण की शिकायतें सामने आना गंभीर सवाल खड़े करता है।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोगों द्वारा उत्तर प्रदेश शासन एवं संबंधित उच्चाधिकारियों से शिकायत कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की तैयारी की जा रही है। शिकायतकर्ताओं की मांग है कि मौके का स्थलीय निरीक्षण कर यह स्पष्ट किया जाए कि निर्माण के लिए कोई विभागीय अनुमति जारी हुई थी या नहीं और यदि अनुमति नहीं थी तो निर्माण कार्य किसकी जानकारी अथवा सहमति से कराया गया।

अब निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं कि कथित अनधिकृत निर्माण के मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होती है या मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाता है।




