“गरीबी से निकलकर रुड़की का गौरव बने – श्री सतेंद्र गुप्ता जी”
आज हम बात करते हैं उस अनमोल हीरे की, जो एक बेहद गरीब परिवार से निकलकर रुड़की शहर की शान बन गया। जिनके पिता का कोई विरासत में दिया हुआ नाम या साधन नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने मेहनत और संघर्ष से वो कर दिखाया जिसे कभी सिर्फ सपना समझा जाता था।
श्री सतेंद्र गुप्ता जी, रुड़की
शहर के पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट (1982) बने। उनका जीवन स्वयं एक प्रेरणादायक गाथा है – गरीबी, अभाव, संघर्ष और फिर सफलता। उन्होंने यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती।
उनकी नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शिता ने रुड़की को शैक्षिक मानचित्र पर चमकाया। वे रुड़की इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (RIT) के अध्यक्ष बने और फिर 2010 में पिरान कलियर में “रुड़की कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग (RCE)” की स्थापना की। महज़ दो कमरों से शुरू किया गया यह संस्थान आज एक विशाल शिक्षण संस्थान बन चुका है, जिसकी गिनती उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग कॉलेजों में होती है।
उनकी मेहनत और प्रयासों का ही परिणाम है कि 2023 में उन्होंने ‘हरिद्वार यूनिवर्सिटी’ की स्थापना की – जो अब न केवल रुड़की बल्कि पूरे उत्तर भारत में शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। यहां से पढ़कर हजारों छात्र-छात्राएं देश और विदेश में उच्च पदों पर कार्यरत हैं।
आज श्री सतेंद्र गुप्ता जी न केवल हरिद्वार यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष हैं, बल्कि रुड़की शहर का गौरव भी हैं। उनका जीवन एक जीवंत प्रेरणा है – यह दर्शाने के लिए कि साधन नहीं, संकल्प बड़ा होना चाहिए।
रुड़की शहर को उन पर गर्व है।
इसी क्रम में उनकी एक खास पहचान 12 अप्रैल 2024 से “अपना घर आश्रम”, जिसकी 150 बिस्तरों की क्षमता है रुड़की की सबसे संवेदनशील संस्थाओं में से एक है। यह संस्था उन लोगों की सेवा में लगी है, जिनका कोई नहीं होता जिन्हें समाज ने ठुकरा दिया, जो मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं, या जो सड़कों पर भीख मांगते और बेबसी का जीवन जीते हैं। अपना घर आश्रम ऐसे पीड़ित और बेसहारा लोगों को सहारा देता है।
गुप्ता जी मानते हैं कि-
“जब इंसान दूसरों की भलाई सोचता है, तो उसका अपना मन भी शुद्ध होता है। आत्मा को सच्चा सुख मिलता है, और उसका भला स्वयं ईश्वर करते हैं। शाश्वत सुख कहीं बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर ही है। लेकिन इसे पाने का मार्ग है- मानव सेवा।




