भारतीय जनता पार्टी द्वारा जिला अध्यक्षों की नई सूची जारी होते ही सैनी समाज में निराशा की लहर दौड़ गई है। समाज के कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे लंबे समय से संगठन में प्रतिनिधित्व की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन इस बार भी सूची में सैनी समाज को कोई स्थान नहीं दिया गया।

स्थानीय नेताओं के अनुसार, पिछले कई महीने से सैनी समाज के सक्रिय कार्यकर्ता लगातार पार्टी कार्यक्रमों में शामिल रहे और विभिन्न वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात भी करते रहे। समाज का आरोप है कि उन्हें आश्वासन तो दिए गए, लेकिन जब जिम्मेदारी देने की बात आई, तो उनके नाम सूची से बाहर रखे गए।
समाज से जुड़े कार्यकर्ताओं ने बताया कि—
सैनी समाज ने हर चुनाव में पार्टी का समर्थन किया,
संगठन के हर मोर्चे पर सक्रिय भूमिका निभाई,
लेकिन जिले में शीर्ष पद के लिए किसी भी नाम पर विचार नहीं किया गया।

कई स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि सैनी समाज का कई क्षेत्रों में मजबूत जनाधार है, और ऐसे निर्णय कार्यकर्ताओं की भावनाओं को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पार्टी को भविष्य में समाज की भागीदारी पर गंभीर पुनर्विचार करने की जरूरत है।
फिलहाल, जिला अध्यक्षों की घोषणा के बाद यह मुद्दा स्थानीय राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।




