उत्तराखंड के दो माननीय विधायक विनोद चमोली और किशोर उपाध्याय ने उत्तराखंड के सदन को क्षेत्रवाद की भावना के साथ कलंकित करने का काम किया है और भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने उनका बचाव किया।
मैं इन दोनों महानुभाव को मीडिया व जनता की उपस्थिति में खुली बहस की चुनौती देता हूं। (स्थान और समय यह तय कर लें और सार्वजनिक रूप से घोषित कर दे।)
खुली बहस में केवल एक बिंदु पर चर्चा होगी और वह है कि 25 वर्षों के उत्तराखंड की विकास यात्रा में भारतीय जनता पार्टी का उत्तराखंड राज्य के विकास में क्या योगदान रहा है। उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक को यह जानने का हक है कि जो लोग उत्तराखंड में समरसता और समभाव के बजाय नफरत और भेदभाव को बढ़ावा दे रहे हैं, वह उत्तराखंड के समग्र विकास को लेकर कितने चिंतित अथवा जिम्मेदार हैं।
उत्तराखंड के नागरिक को यह भी मालूम होना चाहिए कि सांप्रदायिकता की जहरीली भट्टी पर चढ़कर उन्होंने जिन लोगों को दो बार सत्ता सौंपने का काम किया, वह अपने भीतर से कितने कलंकित और कलुषित है




