श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध भारतीय महाविद्यालय, बेडपुर कलियर (रुड़की) में अध्ययनरत एमपीएच (Master of Public Health) के छात्र-छात्राओं का भविष्य अब प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ता जा रहा है।
महाविद्यालय प्रशासन द्वारा कुलसचिव, श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय को भेजे गए पत्र के अनुसार,
एमपीएच सत्र 2023–25 का द्वितीय वर्ष परिणाम तथा
सत्र 2024–26 का प्रथम वर्ष परिणाम
अभी तक विश्वविद्यालय द्वारा घोषित नहीं किया गया है, जबकि परीक्षाएँ मई 2025 में ही संपन्न कराई जा चुकी थीं।
इस अनिश्चितता के कारण सैकड़ों छात्र-छात्राएँ मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं। न तो उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए प्रमाणपत्र मिल पा रहे हैं, न ही किसी भी नौकरी या उच्च शिक्षा के लिए आवेदन करने में वे सक्षम हैं।
छात्रों का कहना है —
“हमने समय पर परीक्षा दी, फीस जमा की, सारे कार्य पूरे किए, फिर भी नतीजे न आने से हमारा साल बर्बाद हो रहा है। विश्वविद्यालय और सरकार को यह समझना चाहिए कि यह सिर्फ कागज का काम नहीं, हमारे भविष्य का सवाल है।”
महाविद्यालय ने भी विश्वविद्यालय को लिखित रूप से यह आग्रह किया है कि छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए शीघ्र परिणाम घोषित किए जाएँ।
पत्र में उल्लेख है कि इस विलंब से छात्र-छात्राएँ “मानसिक रूप से बहुत परेशान” हैं और बार-बार परिणाम के इंतज़ार में असमंजस की स्थिति में हैं।
अब छात्र समुदाय सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से यह मांग कर रहा है कि —
तत्काल परिणाम घोषित किए जाएँ,
उत्तरदायित्व तय किया जाए कि यह देरी क्यों हुई,
और ऐसी लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए स्थायी समाधान निकाला जाए।
एक छात्र प्रतिनिधि ने कहा —
“अगर प्रशासन ने अब भी ध्यान नहीं दिया तो हम विश्वविद्यालय और शासन स्तर पर सामूहिक रूप से आवाज़ उठाएँगे। शिक्षा को मज़ाक बनने नहीं देंगे।”
यह मामला न केवल छात्रों के भविष्य का है, बल्कि शिक्षा तंत्र की संवेदनहीनता का आईना भी दिखा रहा है।
सरकार को चाहिए कि तुरंत संज्ञान लेकर परिणाम घोषित करवाए और छात्रों के वर्षों की मेहनत को यूँ व्यर्थ न जाने दे।




