देहरादून। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी विद्यालयों में रामायण और वेद आधारित कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्णय पर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सांसद चंद्रशेखर आज़ाद द्वारा की गई आलोचना पर अब तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
राष्ट्रीय त्यागी भूमिहार ब्राह्मण समाज, उत्तराखण्ड के प्रदेश महामंत्री प्रिंस त्यागी ने सांसद के बयान को “भारत की मूल संस्कृति और सनातन विरासत का अपमान” बताया है।
प्रिंस त्यागी ने कहा,
“सांसद चंद्रशेखर जी जिस संविधान का हवाला देकर रामायण और वेद को विद्यालयों में पढ़ाने पर आपत्ति जता रहे हैं, क्या उसी संविधान के अंतर्गत मदरसों को सरकारी अनुदान देना और वहां एक धर्म विशेष की शिक्षा देना जायज़ है? क्या वहां संविधान लागू नहीं होता? आपकी जुबान उस समय क्यों नहीं खुलती जब सरकार के पैसों से एकतरफा धार्मिक शिक्षा दी जाती है?”
उन्होंने आगे कहा,
“जिस धर्म में आप जन्मे, जिस समाज ने आपको खड़ा किया, उसी सनातन धर्म को अपमानित कर आप कौन-से अधिकार की बात कर रहे हैं? क्या आप सांसद इसलिए बने क्योंकि आप एक श्रेष्ठ योग्य उम्मीदवार थे, या इसलिए क्योंकि वह सीट आरक्षित थी? आप खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं – यदि वास्तव में समाजसेवक होते तो किसी साधारण कार्यकर्ता को टिकट देकर सांसद बनाते। लेकिन ऐसा करने से राजनीति की रोटियाँ नहीं सिकेंगी।”
प्रिंस त्यागी ने कहा कि वेद और रामायण जैसे ग्रंथ केवल धार्मिक नहीं बल्कि नैतिकता, जीवन मूल्य, कर्तव्य और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देने वाले ग्रंथ हैं। इन पर कार्यशालाएं आयोजित करना शिक्षा को भारतीयता से जोड़ना है, न कि धर्म थोपना।

उन्होंने दो टूक कहा –
“जो रामायण और वेद से डरते हैं, वे भारत की आत्मा को नहीं समझते। यह एकपक्षीय धर्मनिरपेक्षता नहीं चलेगी। हमें ऐसे नेताओं की जरूरत है जो भारत को जोड़ें, तोड़ें नहीं।”




