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भारतीय किसान यूनियन क्रांति (अराजनीतिक) संगठन में भूचाल आ गया है।*

रिपोर्ट अभिषेक सैनी

 

संगठन के तमाम पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एक साथ अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। यह कोई छोटा-मोटा फैसला नहीं है, बल्कि एक ऐसा धमाका है जिसने पूरे संगठन को हिलाकर रख दिया। इस बगावत के पीछे की वजह संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास सैनी की नीतियाँ और उनकी कथित मनमानी बताई जा रही है।

 

 

इस पूरे घटनाक्रम का नेतृत्व कर रहे गजेंद्र चौधरी ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने बड़े दुखी मन से कहा, “हमें यह कठोर कदम उठाना पड़ रहा है। विकास सैनी की गलत नीतियों और उनकी मनमानी के चलते हमें बार-बार अपमान सहना पड़ा। अब हमारा सब्र का बाँध टूट गया है।” गजेंद्र चौधरी के साथ-साथ तनुज चौधरी, आशीष चौहान, अनुज चौहान, विकास पवार, मोहित चौधरी, रजत चौहान, शुभम चौधरी, राजवीर सिंह, अंशुल कश्यप और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भी संगठन को अलविदा कह दिया। गजेंद्र ने साफ किया, “यह हमारा अपना फैसला है। किसी का कोई दबाव नहीं है। हम अपनी मर्जी से संगठन छोड़ रहे हैं, ताकि आगे चलकर अपने सम्मान की लड़ाई और समाज की सेवा के लिए काम कर सकें।”इस बगावत में गजेंद्र चौधरी को उनके साथियों का पूरा समर्थन मिला है। अनुज सासी ने भी इस मौके पर अपनी बात रखते हुए कहा, “हम सब भाई गजेंद्र के साथ हैं। जब संगठन में उनके जैसे समर्पित व्यक्ति का सम्मान नहीं हो रहा, तो फिर हमारा क्या होगा? हम सब आज भारतीय किसान यूनियन क्रांति से इस्तीफा दे रहे हैं।” अनुज ने जोर देकर कहा कि यह कदम सिर्फ एक संगठन से अलग होने का नहीं, बल्कि सम्मान और आत्मसम्मान की लड़ाई का है।यह इस्तीफों का सैलाब संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या विकास सैनी की नीतियों ने सचमुच संगठन को इस कगार पर ला खड़ा किया? या फिर इसके पीछे कोई और गहरी सियासत है? गजेंद्र चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संगठन के किसी भी पदाधिकारी से व्यक्तिगत बैर नहीं है, लेकिन हालात ऐसे बन गए कि

 

उनके पास कोई और रास्ता नहीं बचा।इस घटना ने न सिर्फ संगठन के भीतर हलचल मचाई है, बल्कि बाहर भी चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है। क्या यह इस्तीफा एक नई शुरुआत की ओर इशारा कर रहा है? क्या गजेंद्र और उनके साथी अब कोई नया मंच तैयार करेंगे? या फिर यह सब सिर्फ एक आंतरिक विद्रोह का नतीजा है? आने वाला वक्त ही इन सवालों का जवाब देगा। लेकिन अभी के लिए इतना तय है कि “जय जवान, जय किसान” का नारा लगाने वाले ये लोग अपने सम्मान की इस जंग को हर हाल में लड़ने को तैयार हैं। यह खबर अब हर तरफ फैल रही है

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